*भारतीय मीडिया फाउंडेशन की मांग SOP लागू करने से पहले पत्रकार सुरक्षा अधिनियम लागू करने एवं प्रत्येक राज्यों में मीडिया कल्याण बोर्ड का सरकार कराएं गठन*
*SOP क्या है मीडिया कर्मियों के लिए कितना होगा हितकर इसकी हो पूरे देश में सार्वजनिक चर्चा*– एके बिंदुसार संस्थापक भारतीय मीडिया फाउंडेशन

नई दिल्ली*-भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक एवं केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष एके बिंदुसार एवं केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी के केंद्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि कांत साहू ने संयुक्त रूप से केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि SOP क्या है इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए मीडिया कर्मियों के लिए कितना यह लाभदायक होगा इस पर भी एक बड़ी चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसके लिए देश प्रदेश में चलने वाले मीडिया संगठनों एवं प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों के अध्यक्षों एवं डायरेक्टर को बुलाकर एक मीटिंग गृह मंत्रालय द्वारा किया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा अधिनियम लागू करने के साथ-साथ प्रत्येक राज्यों में मीडिया कल्याण बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए मीडिया से संबंधित सभी कानूनों पर एक बेहद चर्चा होनी चाहिए उन्होंने कहा कि आजादी के 7 दशक बीत जाने के बाद भी पूरे भारत में पत्रकार सुरक्षा अधिनियम लागू नहीं हो पाया और न तो प्रत्येक राज्य में मीडिया कल्याण बोर्ड का गठन हो पाया यह एक बड़ा सवाल हैं 7 दशक में जो भी सरकारें देश में आई उन्होंने कभी भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया के बारे में जरा भी नहीं सोचा ।
उन्होंने कहा कि सूचना प्रसारण मंत्रालय के मनमाने गाइडलाइंस का देश के समस्त पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता अपना विरोध प्रकट करें अगर पत्रकारों की सुरक्षा का चिंता सरकार को है तो पूरे देश में सभी राज्यों में पत्रकार सुरक्षा अधिनियम लागू करें एवं मीडिया कल्याण बोर्ड का गठन करें इसके साथ-साथ पत्रकारों की जनगणना कराएं न्यूज़ पोर्टल को सूचीबद्ध करने के लिए ऑनलाइन कार्यक्रम चलाएं।
बेमतलब की गाइडलाइंस का समर्थन नहीं किया जाएगा यह पत्रकारों के अभिव्यक्ति को कुचलने की योजना है।
पुलिस की नाकामी को छिपाने के लिए पत्रकारों को टारगेट बनाया जा रहा है न्यूज़ चैनल एवं न्यूज़ पोर्टल को टारगेट बनाया जा रहा है।
इसके पहले भी बहुत सारे माफियाओं का हत्या हुआ कई बेगुनाह भी मारे गए कई पत्रकारों की हत्याएं हुई कई पत्रकारों के ऊपर फर्जी मुकदमे किए गए लेकिन सरकार को उस समय यह नहीं समझ आया कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई कानून बनना चाहिए।
कई पत्रकार संगठनों ने लगातार पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की आवाज भी उठाया।
उन्होंने कहा कि देश में कोई भी पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता फर्जी नहीं है देश की सेवा करने के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस की जरूरत नहीं है संविधान के नियमों का सरकार पालन करें पहले से ही पत्रकारों की अभिव्यक्ति की आजादी उन्हें संविधान के मौलिक अधिकार अनुच्छेद 19 में दिया गया है आगे सिर्फ पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी सरकार ले और उनके अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश न लगाएं।
उन्होंने कहा कि इस तुगलिया फरमान का विरोध सभी पत्रकारों को करना चाहिए।