जुलाई 2021 से चले पटीसन मुकद्दमे में आखिर 27 अगस्त 2022को ईमानदारी को मिली जीत

उपजिलाधिकारी के आदेश पर हुई री-काउंटिंग में रीता हुई विजयी।*
*जुलाई 2021 से चले पटीसन मुकद्दमे में आखिर 27 अगस्त 2022को ईमानदारी को मिली जीत।*
जनपद एटा के विकास खण्ड अलीगंज में ग्राम गेबर असदुल्लापुर के पंचायत चुनाव में तत्कालीन मतगणना में में हेराभेरी कर रीता पत्नी रवेंद्र को हराकर कविता को विजयी घोषित कर दिया गया था,इस पर बेईमानी की जानकारी होने पर रीता ने एसडीएम अलीगंज के न्यायालय में विद्वान अधिवक्ता अम्बरीष सिंह राठौर के द्वारा जुलाई 2021 को पटीसन दायर की गई थी।उप जिलाधिकारी में लगातार तारीखे पड़ती रही,विपक्षी अधिवक्ता ओमहरी सक्सेना की दलीलों  और वादी द्वारा उपलब्ध कराए गए चुनाव मतगणना में हुई हेराफेरी के साक्ष्य को देखते हुए,एसडीएम अलीगंज मानवेन्द्र सिंह ने दिनांक27 अगस्त को पुनः मतगणना कराने का आदेश पारित किया,इस आदेश के अनुसार आज दिनांक 29 अगस्त को नोडल अधिकारी विक्रम सिंह चाहर के निर्देशन में वादी पक्ष रीता पत्नी रवेंद्र के विद्वान अधिवक्ता अम्बरीष सिंह राठौर,प्रतिवादी कविता पत्नी देबेन्द्र के अधिवक्ता ओमहरी सक्सेना की उपस्थिति में स्टोर रूम से लाये गए सील्ड बक्से में रखे गए बैलेट बॉक्स को वीडियोग्राफी के साये में खोला गया।उसमें से निकले प्रपत्र 45 में विजेता की संख्या 106 की जगह 186 अंकित किया गया था,इसकी बजह से कुल योग388 की जगह 468 हो रहा था।दोनो अधिवक्ताओं के समक्ष बूथ सँ17 में 12 मतों में दो प्रत्याशियों की मोहर लगी हुई थी,जो कि मतगणना के नियमानुसार कैंसिल मत माने जाते हैं, उनको पूर्व में जीते प्रत्यासी कविता के वोटों में गिन दिया गया था,इसमें वादी पक्ष की रीता के 208 मत सही निकले वाकी प्रतिवादी के 200 मतों में 12 अवैध मत पाए गए।इस तरह वादी रीता पत्नी रवेंद्र के वैध मत 208 और प्रतिवादी कविता पत्नी देवेन्द्र के 200 मत वैध पाए गए।नोडल अधिकारी विक्रम सिंह चाहर के द्वारा रीता पत्नी रवेंद्र को 8 मतों से विजयी बताया गया।लगभग 13 माह चले मुकद्दमे में सत्य की जीत हुई और असत्य हार गया।जीती प्रत्यासी रीता का चुनाव चिन्ह कैरमबोट था,जबकि हारी प्रत्यासी का चुनाव चिन्ह उगता सूरज था।विजयी प्रत्यासी रीता ने मीडिया को बताया कि चुनाव में गड़बड़ी की सूचना मैंने तत्कालीन मतगणना कर्मचारियों को दी थी पर उन्होंने विपक्ष के दवाब के चलते मेरी एक नहीं सुनी तब मुझे न्याय के लिए उपजिलाधिकारी के न्यायालय में शरण लेनी पड़ी, मेरे विद्वान अधिवक्ता ने समस्त साक्ष्य को प्रस्तुत कर उपजिलाधिकारी के न्यायालय में लगातार मेरे साथ हुई नाइंसाफी को खुलकर सामने रखा, उधर विपक्ष के अधिवक्ता कोई भी साक्ष्य नहीं जुटा पाए,इस कारण विद्वान उपजिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने पुनः मतगणना के आदेश दिए,जिसमे आज ईमानदारी से हुई मतगणना में मुझे विजयी घोषित किया गया।रीता ने प्रधान पद पर मिली जीत को असत्य पर सत्य की जीत बताया है।रीता के अधिवक्ता अम्बरीष सिंह राठौर ने मीडिया सर रूबरू होते हुए,बताया कि हमने यह केश जुलाई2021 में उपजिलाधिकारी महोदय के न्यायालय में डाला था,जिसमें सत्यता के आधार पर उपजिलाधिकारी ने अपने विवेक के द्वारा चुनाव में हुई हेराफेरी के साक्ष्यों के आधार पर उचित निर्णय देते हुए पुनः मतगणना के आदेश पारित किए जिसमे हमारे प्रत्यासी को वीडियो ग्राफी के साये में खुले मंच पर हुई मतगणना में 8 मतों से जीत मिली यह अलीगंज एसडीएम मानवेन्द्र सिंह की न्याय प्रक्रिया का एक ऐसा उदाहरण है, जो न्याय की पारदर्शिता को दर्शाता है।रिपोर्ट देवेंद्र शर्मा देवू।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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