श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के संदर्भ में आपकी शंका समाधान का प्रयास हमारा

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत निर्णय
“अग्नि पुराण” के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के संबंध में इस प्रकार कहा गया है ~
वर्जनीय प्रयत्नेन सप्तमी संयुता अष्टमी।
बिना ऋक्षेण कर्तव्या नवमी संयुता अष्टमी।
अर्थात:- जिस दिन सूर्योदय में सप्तमी बेधित अष्टमी हो तो उस दिन व्रत नहीं रखना चाहिए। नवमी युक्त अष्टमी को ही व्रत रखना चाहिए।
पद्म पुराण वर्णित है ~
पुत्रां हन्ति पशून हन्ति, हन्ति राष्ट्रम सराजकम।
हन्ति जातान जातानश्च, सप्तमी षित अष्टमी।
अर्थात अष्टमी यदि सप्तमी विद्धा हो और उसमें उपवास करें तो पुत्र , पशु, राज्य ,राष्ट्र , जात, अजात,सबको नष्ट कर देती है।।
स्कन्द पुराण के अनुसार ~
पालवेधेपि विप्रेन्द्र सप्तम्यामष्टमी त्यजेत।
सुरया बिंदुन स्पृष्टम गंगांभः कलशं यथा।
अर्थात ~ जिस प्रकार गंगा जल से भरा कलश एक बूंद मदिरा से दूषित हो जाता है उसी प्रकार लेश मात्र सप्तमी हो तो वह अष्टमी व्रत उपवास के लिए दूषित हो जाती है।
इन पौराणिक आख्यानों को ध्यान में रखते हुए जन्माष्टमी व्रत एवं जन्मोत्सव 19अगस्त 2022 शुक्र वार को ही मनाना उचित प्रतीत हो रहा है |
प्रभु के अवतरण दिवस पर आप सभी को हमारी हार्दिक शुभकामनाएं प्रभु आपकी मनोकामना पूर्ण करे।