अफसरसाही की हनक से दूर सादा अंदाज मे साइकिल से घूमते कैमरे मे कैद हुए एसएसपी एटा….

सावधान ! साइकिल से शहर की नब्ज टटोल रहे हैं एटा के एसएसपी….

अफसरसाही की हनक से दूर सादा अंदाज मे साइकिल से घूमते कैमरे मे कैद हुए एसएसपी एटा….

एटा।पुराने समय मे राजा अपनी प्रजा का वास्तविक हाल जानने के लिए भेष बदल कर राज्य मे घूमते थे। इस दौरान वे अपने राज्य की वास्तविक स्थिति का आंकलन करते थे और इस दौरान मिलने वाले फीड बैक को राज्य की बेहतरी और कुशल प्रशाशन के लिए प्रयोग करते थे।

इसी तर्ज पर आज एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह आज श्रावण मास के पहले सोमवार को एटा शहर की कानून व्यवस्था का जायजा लेने के लिए साइकिल से ही निकल पड़े। इस दौरान किसी को भनक तक नहीं लगी और वो पूरे एटा शहर के प्रमुख मंदिरों पर तैनात पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेकर निकल गए। दर असल सावन के पहले सोमवार को एटा पुलिस प्रशाशन ने कावड़ियों और श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किये थे। प्रदेश शाशन के निर्देशों के अनुसार पिछले कई दिनों से पुलिस प्रशाशन को कावड़ यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए ब्रीफ किया जा रहा था। इस दृस्टि से पूरे जनपद को 5 जोन और 18 सेक्टर मे बाँटा गया था। साथ ही कावड़ यात्रियों के रुट पर पुलिस की 70 बीट बनायीं गयी थी। साथ ही 42 स्थानों पर पुलिस सहायता केंद्र बनाये गए थे जहाँ पर आकस्मिक चिकित्सा सुविधा भी मुहैय्या कराई गयी थी। जोन स्तर पर उप जिला अधिकारियों और क्षेत्राधिकारियों की ड्यूटी लगायी गयी थी।
इस दौरान इन सारी तय व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए एसएसपी एटा उदय शंकर सिंह एक टीशर्ट और ट्राउजर पहन कर एक सादा साइकिल पर सवार होकर निकल पड़े। उनके साथ न तो कोई फ़ोर्स था, न ही कोई ताम झाम।

उनकी साइकिल के पहिये एक एक करके प्रमुख शिव मंदिरों की और बढ़ते चले गए और उन्होंने ग्रास रुट लेविल पर जाकर अपनी खुद की बनाई हुई व्यवस्था को मूर्त रूप लेते देखा। इस दौरान पुलिस की ड्यूटी मे लगे लोग अचानक अपने बॉस को देखकर भौ चक्के रह गए। इस दौरान उन्होंने कैलास मंदिर के बाहर ड्यूटी दे रहे पुलिस कर्मियों को बेरिकेटिंग मे कुछ परिवर्तन करने के भी निर्देश दिए और आगे किसी अन्य मंदिर की और बढ़ गए। इस दौरान हालांकि उन्होंने कैमरे से बचने की लाख कोशिश की पर वे अंततः कैमरे मे कैद हो ही गए।
कुल मिलाकर एसएसपी एटा ने स्वयं अपनी व्यवस्थाओं का आत्म मूल्यांकन किया जो कि प्रबंधन का सबसे बड़ा गुण है। इससे निश्चित ही उनको जो फीड बैक मिला होगा उससे उनको निश्चित ही आगे की पुलसिंग का रोड मैप तैयार करने मे मदद मिलेगी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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