
आगरा: शासन के निर्देश पर माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के अध्यक्ष एवं एडवोकेट बी एल भास्कर को दिनांक 15 /7/22 को शाम 7:00 बजे सिपरी थाना झांसी की पुलिस द्वारा शाम 7:00 बजे अपराधियों की तरह घर से उठा ले जाकर थाने में बंद कर रखा, अपराधियों की तरह और 18 घंटे एक ही जगह पर नजर बंद करके बैठा रे रहे ,पुलिस के कड़े पहरे में, क्योंकि इंटेलिजेंस द्वारा शासन को सूचना दी गई थी कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी को शिक्षकों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन देने की अनुमति देने पर जाएंगे, लेकिन अनुमति और ज्ञापन तो नहीं देने दिया बल्कि 1 दिन पूर्व ही घर से अपराधियों की तरह उठाकर 18 घंटे की कस्टडी में रखकर सजा जरूर मिली। लिखित आश्वासन के बाद पुलिस ने बड़ी मुश्किल से रिहा किया और अपने बचाव में लिखवा लिया ताकि पुलिस के खिलाफ कोई कार्रवाई ना हो सके, इस तरह की घटना से बी एल भास्कर एवं उनका परिवार और बच्चे बहुत दु:खी है।उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों एवं जनता के अधिकारों की आवाज को दबा रही है पिछले कई सालों से शिक्षकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे, अध्यक्ष बी एल भास्कर ने कहा आश्वासन दिए गए थे कि माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय दिया जायगा,सेवा सुरक्षा नियमावली लागू की जाएगी, लेकिन ज्ञापन की सूचना पर देने की सूचना पर ही अपराधियों की तरह थाने बंद कर रखना मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन है भास्कर ने पुलिस से निवेदन भी किया कि मेरी तबीयत खराब है ऑपरेशन हुआ है लेकिन एक बात नहीं सुनी गई जबरजस्ती घर से उठा ले जाकर के थाने में बंद कर दिया, प्रदेश के लगभग 400000 शिक्षक आर्थिक स्थिति से गुजर रहे हैं और उन्हें आशा थी कि मानदेय मिलेगा या समान कार्य के लिए समान वेतन लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है जो शिक्षकों के साथ घोर अन्याय है। शासन में पहुंच जाने के बाद अधिकारी, नेता भूल जाते हैं कि जिस पद पर पहुंचे हैं और जो ज्ञान हासिल किया है वह किसी न किसी शिक्षक द्वारा दिया गया है। लेकिन बाद में वही उनके साथ अन्याय करते हैं जो बहुत ही दु:खद है।
घंटे की पुलिस हिरासत के बाद सिपरी बाजार थाना से बाहर आते हुए एडवोकेट बी एल भास्कर अध्यक्ष माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा