वैदिक सनातन धर्म मात्र में ही निहित है साम्प्रदायिक सद्भावना का संदेश – राजू आर्य
● त्याग, बलिदान एवं सात्विकता का दूसरा स्वरूप है संत जीवन- श्री सुतीक्ष्ण मुनि।

एटा/हरिद्वार- जस्सा राम रोड स्थित जगतगुरु उदासीन आश्रम के 51वें वार्षिक महोत्सव के उपलक्ष में संत समागम का आयोजन हुआ। आयोजित समागम में उत्तर-प्रदेश के पूर्व मंत्री जयप्रकाश यादव जी मुख्य अतिथि एवं भारतीय किसान विकास मंच के उत्तराखंड,उ.प्र. एवं हिमाचल प्रदेश के प्रदेश प्रभारी एवं कट्टर हिंदूवादी नेता रंजीत कुमार उर्फ राजू आर्य, दूरसंचार निगम भारत के पूर्व निदेशक एवं पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी स्वरूप चौधरी, प्रमुख व्यवसायी सुभाष मेहता, उद्योगपति वी.के चतुर्वेदी, गुड़गांव के प्रमुख व्यवसायी महेंद्र सेठी जी विशेष अतिथि के तौर पर सम्मिलित हुए। इस मौके पर संबोधन में श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के श्रीमहंत रघुमुनि महाराज ने कहा है कि वैराग्य वृत्तियों से युक्त इस समाज के उद्धार एवं कल्याण के लिए ही सभी संतों का जीवन समर्पित है। सात्विक जीवन का अनुसरण कर संत समाज राष्ट्र की एकता एवं अखंडता बनाए रखने में अपना अतुल्य योगदान सदा से ही प्रदान करता आया है। समागम के दौरान श्रीमहंत रघुमुनि महाराज ने ब्रह्मलीन स्वामी सतनाम दास महाराज के त्याग एवं तपस्या की किवंदतियाँ सुनाते हुए बताया कि वह त्याग एवं परोपकार की साक्षात प्रतिमूर्ति एवं परोपकार की पराकाष्ठा का सजीव स्वरूप थे। उन्होंने जीवन पर्यंत सनातन परंपराओं का निर्वहन करते हुए धर्म और संस्कृति का प्रचार प्रसार किया। संत समाज एवं लोक-कल्याण में उनका अहम योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। जिन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष का भ्रमण कर धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भावी पीढ़ी को प्रदान की। ऐसे महापुरुषों के जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का आभार व्यक्त करते हुए जगतगुरु उदासीन आश्रम के अध्यक्ष महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज ने अपने संबोधन में सनातन धर्म के उद्देश्य एवं संत समाज के मूल कर्तव्यों के बारे में बताते हुए कहा कि सनातन धर्म का प्रचार,प्रसार एवं पुनरुद्धार ही सम्पूर्ण संत समाज का एक मात्र मूल उद्देश्य है, सत्य सनातन वैदिक धर्म के बिना संसार का अस्तित्व कल्पना मात्र रह जायेगा।
रंजीत कुमार उर्फ राजू आर्य ने 51वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में कहा कि सर्वप्रथम हमें सम्पूर्ण संत समाज का आभारी होना चाहिए जिनके माध्यम से हमारे सनातन दबारम का पुनः प्रसार, प्रचार पूर्वकालिक अवस्था में लौट रहा है। संत समाज के अतुलनीय प्रयासों से ही संसार के सभी धर्मों की नींव व जननी सनातन धर्म अपनी पूर्ववधारित अवस्था में वापस आने में सक्षम हुआ है। संत समाज अपने सेवा प्रकल्पकों के माध्यम से हमेशा ही राष्ट्र निर्माण में सहयोग करता आया है।
अपने संबोधन में आर्य ने जोड़ते हुए कहा कि हमारा राष्ट्र संत-समाज के त्याग एवं बलिदानों का हमेशा ऋणी रहेगा। इसके साथ ही पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी सतनाम दास महाराज जी का महिमा मंडन करते हुए आर्य ने कहा कि उनके जीवन दर्शन से मुझे हमेशा ही वैदिक धर्म संस्कृति और राष्ट्र के उद्धार की प्रेरणा मिलती है। ऐसे उच्च कोटि के दार्शनिक, विचारक, सामंतवादी महापुरुष समाज को विरले ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि संतो के दर्शन मात्र से व्यक्ति का उद्धार हो जाता है और जिस प्रकार से उन्हें संत समाज का स्नेह प्राप्त हो रहा है। वह उनके लिए अनुकरणीय है। युवा भारत साधु समाज के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी रविदेव शास्त्री एवं स्वामी हरिहरानंद महाराज ने कहा कि अपना जीवन परोपकार को समर्पित करने वाले संत महापुरुष सदैव ही अपने भक्तों को ज्ञान की प्रेरणा देकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ब्रह्मलीन स्वामी सतनाम दास महाराज एक महान संत थे। जिनके आदर्शो को अपनाकर युवा संत के रूप में महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज आश्रम द्वारा संचालित सेवा प्रकल्पों में निरंतर बढ़ोतरी कर रहे हैं।
इस अवसर पर प्रदीप यादव प्रीतोष यादव,पुष्पेंद्र राजपूत,निमेष यादव, व्यवसायी पंकज गुप्ता, व्यवसायी रमेश अरोड़ा, विवेक अग्निहोत्री, अंकुर शाक्य, विकास मेहता, अनुज चतुर्वेदी एवं शाहदरा दिल्ली से आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रदीप उपाध्याय जी,समेत कई सैकड़ों साधु संत-महंत एवं हजारों की संख्या में भक्तजन मौजूद रहे।