
Agra. करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर चालीस साल पहले मालिकाना हक के लिए कलक्ट्रेट में मुकदमा चला और फैसला कब्रस्तिान के हक में हुआ। तत्कालीन वक्फ आयुक्त ने माना कि खसरा नंबर 345, 346, 347 कब्रस्तिान की जमीन है। संपत्ति को लेकर सरकारी गजट बना। उसके बाद भी विधायक ने चार साल पहले बैनामा करा लिया। उनके पुत्रों ने कब्रस्तिान की जमीन पर कब्जा कर लिया। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोड से संपत्ति देखरेख की जिम्मेदारी लेकर आये सचिव (मुतवल्ली) और अध्यक्ष घरों में बैठे तमाशा देखते रहे, या फिर यूं कहें कि अध्यक्ष और सचिव ने कब्रस्तिान में दफन मुर्दों का सौदा कर दिया। जनसंदेश ने इस मामले में बीस साल से सचिव पद पर बैठे व्यक्ति से जानकारी मागी तो संतोषजनक जबाव नहीं दे सके। वक्फ जिम्मेदारों को लेकर भी बहुत खामियां हैं, जानने के लिए पढ़िये हमारी यह पड़ताल रिपोर्ट…