द,कश्मीर फाइल के टेलर से आहत हुई मुस्लिमो की भावनाएं

द,कश्मीर फाइल के टेलर से आहत हुई मुस्लिमो की भावनाएं

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म के खिलाफ बॉम्बे HC में PIL

इंतेज़ार हुसैन ने की रिलीज रोकने की मांग

मुबंई। इंतेज़ार हुसैन ने की रिलीज रोकने की मांग 1990 की दसक में जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई बर्बरता की कहानी और उनके विस्थापन पर आधारित विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स लगातार कट्टरपंथियों के निशाने पर है इसके लिए उन्हें कट्टरपंथियों की तरफ से धमकियां तो मिल ही गई थी। अब उनकी फिल्म के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसमें इस फिल्म को रिलीज होने से रोक लगाने की मांग की गई है।
‘ ला बीट’ रिपोर्ट के मुताबिक – उत्तर प्रदेश में रहने वाले इंतेज़ार हुसैन सईद नाम के एक सख्स ने कोर्ट में PIL दायर की गई है, जिसमें उसने विवेक अग्निहोत्री द्वार निर्देशित दो कश्मीर फाइल्स की रिलीज को रोकने की मांग की गई है,
हुसैन ने मुंबई हाई कोर्ट में कहा कि इस फिल्म के ट्रेलर से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। इसमें भड़काऊ दृश्य संप्रदायिक हिंसा का कारण बन सकता है।
शईद का तर्क है कि द कश्मीर फाइल्स की रिलीज को रोक दिया जाना चाहिए क्योंकि the Kashmir files trailer में ‘नस्ली और भेदभाव पूर्ण टिप्पणी’ की गई है, और इसमें कश्मीरी पंडितों की हत्या का लेखा-जोखा है।जो घटना का एक तरफा चित्रण करता है, जिससे मुस्लिमों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं..
जनहित याचिका में कहा गया है..
“The Kashmir files trailer में मुसलमानों जागो,
काफिरों भागो, सब्द दीवार पर लिखा हुआ देखा जा सकता है,जो हिंदुओ और मुस्लिमो में सांप्रदायिक असंतुलन पैदा करने के साथ साथ फिल्म के नरेटिव को आगे बढ़ाता है याचिका में Kashmir files को 11 मार्च को रिलीज रोकने की मांग की गई है,
याचिकाकर्ता इंतेज़ार हुसैन सईद ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की द कश्मीर फाइल्स फिल्म केवल दुष्प्रचार का पीस है,ये भड़काऊ और आग लगाने वाला काम है।ये रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं है। The Kashmir files संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के प्रतिबन्ध के तहत आता है क्योंकि; व्यक्ति दूसरों के मौलिक अधिकारो का उलंघन करते हुए बुनियादी मौलिक अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकता।
इस मामले में विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट के जरिए कहा एक छोटी सी फिर से इतना डर! मुझे बताओ मैं क्या करूं।
इसके साथ उन्होंने यह भी कहा मैं किसी भी अदालत या उनकी किसी भी पसंद के मंच पर साबित कर सकता हूं कि मेरी फिल्म का हर फ्रेम, हर शब्द सच है। सच्चाई के सिवा कुछ नहीं। वे जितनी चाहे बाधाएं खड़ी कर सकते हैं लेकिन मुझे चुप नहीं कराया जा सकता।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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