
#कलम से टकराना,बिनाश काले बिपरीत बुद्धि का ही उदाहरण होता है—
एटा-मीडिया तो हर सरकार मे वलिका बकरा बनती है कौनसी सरकार है अबतक मीडिया की हितैषी रही हो जिसने गुलामी की उसके शिवाय सरकार अपना आत्मसात करे कि समाज के हर बर्ग ब्यक्ति के लिये कुछ ना कुछ दे रही है लेकिन मीडिया ही लावारिस जान हथेली पर रखकर सच बोलने की दुश्मनी ले रही है तब कौनसी सरकार ने मीडिया का समर्थन किया है मीडिया को सरकारें एक दूसरे का गुलाम बताकर हमला कर रही है,सच कहूं वह मीडिया हैही नही लेकिन सर्मनाक सरकारों के लिये जो कलम को इग्नोर कर रही है उनकी बिनाश काले बिपरीत बुद्धि का ही उदाहरण कहा जाएगा,क्यों कि कलम से ज्यादा ताकतवर कुछ हैभी नही सत्ताभोगियो और आने बालों को यह जरूर याद रखना होगा कलम से टकराकर किसी का भला आजतक तो हुआ नहीं है और आगे भी भविष्य की कोख मे ही है जो होना है।
पत्रकार, लेखिका, दीप्ति चौहान।