जनता तय करेगी अपनी सरकार
चुनाव आयोग ने आखिर क्या सख्ती बनाई अब तक
जनता के धन से होता है देश का विकास किन्तु सरकारे उस धन का उपयोग किस रुख में करती है यह सरकार की जिमेददारी

बुलंदशहर । चुनाव प्रचार में सभी पार्टियां जीत को लेकर भरपूर तरीके से जनसंपर्क में जुड़ी हुई है । किन्तु 21वी शताब्दी में देश की जनता में काफी तब्दीली देखने को आई है । वही पुराने चलन में चुनाव प्रचार में होने वाले वहनो में भी चुनाव आयोग की सख्ती से काफी तब्दीली देखने को नजर आ रही है । हालांकि चुनावी दौर में प्रत्याशी जनता से वोट मांगने के नाम पर तरह तरह के प्रलोभन देते हुए विकास के मुद्दों पर वायदे कर रहे है ,किन्तु वास्तविकता यह है कि चुनाव जीतने के उपरांत अधिकतर प्रत्याशी पांच वर्ष के लिए जनता से किनारा करते हुए अपने वायदों को भी भरपूर तरीके से निभा नही पाते है । हालांकि जनता के धन से ही देश का विकास होता है किन्तु सरकारी वायदों में प्रलोभन इस प्रकार दिया जाता है कि कही सारा खर्च देश की जनता के लिए सरकार खर्च कर रही है वो यह भूल जाते है कि जनता के धन से ही विकास कार्य होते है अब उस विकास कार्य खर्च में सरकार ने जनता के धन का सदुपयोग किया है या दुरपयोग यह सरकार जाने किन्तु सही बात यह है कि जनता का धन ही जनता के लिए विकास कार्यो के नाम पर खर्च करती है सरकारे। यही नही टिकिट लेने की लालसा में प्रत्याशी को अगर किसी मजबूत पार्टी से टिकिट नही मिल पाता तो वह अन्य पार्टियों में भी टिकिट लेने की भरपूर कोशिश में जुट जाता है । आये दिन देखने को नजर आता है कि एक प्रत्याशी जो उसके जीवन से जुड़े आपराधिक परिस्थिति के मामलों में लिप्त है किन्तु उसके बाद भी आखिर किस कारण आपराधिक मामलों में लिप्त होने के बाद भी टिकिट कैसे मिल जाता है आखिर इस विषय पर भी चुनाव लड़ने के लिए कुछ प्रतिक्रिया बनाई गई है किन्तु उसका अनुपालन न होने के बाद भी आखिर प्रत्याशी कैसे चुनाव लड़ने का दावा कर लेता है आखिर क्यों चुनाव आयोग इस ओर ध्यान नही दे पाता है आखिर क्या कारण है बैंक नोड्यूज किसी बैंक अथवा सरकारी विभाग का बकाया होने के बाद भी चुनाव लड़ने में समस्या पैदा होती है , किन्तु उसके बाबजूद भी काफी प्रत्याशी ऐसे होते है कि बैंक का कर्ज जब्द किये जाने और सरकारी विभाग से बकाए की आर सी निकलने के बाद भी आखिर किस कारण प्रत्याशी चुनावी दौर में कैसे चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो जाता है । हाल ही के ताजा आकड़ो में नजर आया है कि बुलंदशहर से 17 प्रत्याशियों के नाम प्रशासन दुआरा चुनाव लड़ने की श्रेणी से काट दिए गए है । यह वो प्रत्त्याशी है जिनके ऊपर किसी न किसी कारणवश उनके दस्तावेजो में समस्या आई हो या जांच के उपरांत किसी कारणः वश उनके टिकिट को केंसिल किया गया हो । हालांकि चुनाव प्रचार में कोविड19 के अनुपालन हेतु सख्त निर्देश भी दिए गए है ओर प्रशासन के माध्यम से ऐसे प्रत्याशियों पर कार्यवाही भी हो चुकी है किन्तु उसके बाबजूद भी जमकर कोविड19 के अनुपालन की धच्चिया बिखेरी जा रही है । जिसके कारण पूर्व में हुए चुनाव के अन्तर्गरत काफी बुरी तरह से कोरोना महामारी का संकट पैदा हुआ था कही प्रशासन की अनदेखी में वर्तमान में कोरोना ओर ओमीक्रोन का महासंकट पैदा न हो जाये इस ओर चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार सख्ती तो बताई गई है किन्तु इसका अनुपालन किस स्तर तक होगा यह स्प्ष्ट करना असमंजस का विषय बन चुका है । आने वाले चुनाव में जनता स्वम तय करेगी कि सरकार किसकी बनानी है और जनता की वोट ही अपने बहुमत से अपनी सरकार तय करेगी साथ ही जनता को एहसास होगा कि देश को चलाने में ओर सरकार बनाने में जनता का महत्वपूर्ण योगदान होता है ।