
संदीप हत्याकांड में तीन नाबालिग दबोचे, पूछताछ जारी – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – अलीगंज के लॉजिस्टिक व सीमेंट कारोबारी संदीप गुप्ता हत्याकांड में पुलिस को एक और सफलता हाथ लगी है। सीसीटीवी व सर्विलांस की मदद से पुलिस ने तीन नाबालिग दबोचे हैं। ये तीनों सुनियोजित साजिश के तहत संदीप की रेकी में लगाए गए थे ताकि संदीप की पल-पल की खबर मिलती रहे। इन्होंने साथा सीमेंट फैक्टरी से जेल पुल तक संदीप का पीछा किया। मगर, इन्हें ये नहीं मालूम था कि रेकी क्यों कराई जा रही है। जब संदीप की हत्या हो गई, तब उन्हें सच पता चला। इनमें से दो दसवीं-ग्यारहवीं के छात्र हैं, जबकि एक पढ़ाई छोड़कर ढकेल लगाने लगा है। देर रात तीनों से पूछताछ जारी थी।इधर, शहर में सीसीटीवी का अध्ययन कर रही सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय की अगुवाई में लगी टीम को एक और सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा।जिसमें पाया कि साथा की सीमेंट फैक्टरी से संदीप की फारच्युनर के पीछे टीवीएस बाइक लगातार चल रही है। जिस पर तीन लोग सवार हैं। इन्होंने जेल रोड पुल तक इस कार का पीछा किया है। इन तीनों में से एक बाइक सवार लगातार किसी से मोबाइल पर भी संपर्क में है। देखने से साफ लग रहा है कि वह तीनों इस कार की रेकी कर रहे हैं। बाइक नंबर व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तीनों किशोरों की पहचान हो गई।ये गांधीपार्क धनीपुर मंडी इलाके के रहने वाले हैं। तीनों में से दो वर्तमान में रामघाट रोड के एक माध्यमिक शिक्षा से संबद्ध इंटर कॉलेज में दसवीं व ग्यारहवीं के छात्र हैं, जबकि तीसरे ने पढ़ाई छोड़कर ढकेल लगाना शुरू कर दिया है। शनिवार दोपहर तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो देर रात वे सच उगल गए।सीओ श्वेताभ पांडेय के अनुसार तीनों ने पूछताछ में बताया कि वे धनीपुर इलाके के साहिल यादव नाम के युवक के संपर्क में हैं। दबंग प्रवृत्ति का साहिल पूर्व में हमले के मुकदमे में जेल जा चुका है। वह दुष्यंत व अंकुश का दोस्त है। वह उसे बड़े भाई की तरह मानते हैं। साहिल ने उन्हें घटना वाली दोपहर बुलाया। तीनों में से एक अपनी बाइक पर तीनों को लेकर हरदुआगंज पहुंचा। जहां उन्हें संदीप की गाड़ी का नंबर व रंग आदि बताया गया। यह जिम्मा सौंपा गया कि साथा की सीमेंट फैक्टरी से जब ये गाड़ी चलेगी तो तुमको उसका पीछा करना है और शहर में जहां तक आएगी, वहां तक साथ रहना है। इस दौरान सिर्फ व्हाट्सएप कॉल के जरिये ही बात करके साहिल को अपडेट देना है।इसी क्रम में वे साथा से अनूपशहर रोड, शमशाद मार्केट के रास्ते जेल पुल तक आए। संदीप के डीआईजी दफ्तर जाने के बाद ये तीनों साहिल को अपडेट कर चले गए। इसके कुछ घंटों बाद जब उन्हें संदीप की हत्या की खबर मिली तो वे सन्न रह गए। हालांकि इन्हें अंदाजा न था कि पुलिस उनके घरों पर पहुंच जाएगी। सभी उसके बाद से घरों पर ही मौजूद थे। पूछताछ में ये उजागर नहीं हुआ है कि किसी लालच या डर में उन्होंने ये काम किया। ये बस इतना ही स्वीकारते हैं कि साहिल के कहने पर किया था। कोई लालच या डर नहीं था।