क्या एटा की पब्लिक का इतनाभी अधिकार और सुवधाए नशीव नही कि अच्छी बसे भी एटा डिपो को दी जाए

एटायूपी
सर्मनाक क्या एटा की पब्लिक का इतनाभी अधिकार और सुवधाए नशीव नही कि अच्छी बसे भी एटा डिपो को दी जाए।
आखिर कितना धोखा और दिया जाएगा यातायात के नामपर ट्रेन दी और छीनली क्या एटा पब्लिक के साथ बड़ा धोखा नहीं है,आज हर तरफ सरकार आंधी जैसे आम हिला रही है प्रोगरेस के नामपर कहीं हवाई अड्डा तो कही बड़ी ट्रेन स्टेशन, और एटा मे क्या दिया आपने कभी इसका भी मनन सरकार को करना चाहिए कि इस पिछड़े जिले का विकास कितना हुआ है यह जिला बदनाम ज्यादा है पर है नहीं और जो है भी वह सरकारों की देन है खाली दिमाग सैतान का घर होता है आजका आदमी सोचता कम है करता ज्यादा है, और खाली संसकार किसी का पेट और परिवार नहीं पाल सकते है,तब एक दूसरे की होड़मे नई पीढी पूरी तरह गुमराह हो चली है, हैना शराब का बेहतरीन उद्योग जो इंसानों की जिंदगी से लेकर परिवारों के अधिकार पी रही है उससे भी ज्यादा सर्मनाक कि जितनी पकड़ी जा रही है उतनी ही अमरबेल की तरह—–लगता है, एटा का इग्नोर करना भी सरकारों के अहम मे सामिल हो चला है,येभी कहना गलत नहीं हैकि आजकी सरकार पब्लिक के लिये कुछ कर नहीं रही है पर एटा के लिये आजभी एक सौतेला ब्यबहार बना हुआ है,तब हम इतना तो कहेंगे कि सरकारें पब्लिक के साथ-साथ अपने भविष्य से भी खेल रही है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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