परिंदों को तालीम नहीं दी जाती उड़ानों की, वो तो खुद ही छू लेते हैं बुलंदियां आसमानों की…’

परिंदों को तालीम नहीं दी जाती उड़ानों की, वो तो खुद ही छू लेते हैं बुलंदियां आसमानों की…’

बिहार के फुलवारी शरीफ की रहने वाली 15 वर्षीय तनु पर यह बात सटीक बैठती है। 9 वर्ष की उम्र में अपने दोनों हाथ खो बैठी तनु पटना के गर्दनीबाग स्कूल में पढ़ते हुए पेंटिंग सहित कई प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुकी है, लेकिन अब उसे आगे बढ़ने के लिए सरकार की मदद की जरूरत हैं।

एक छोटे कस्बे में बसे तनु का परिवार उसका हुनर बेचकर अपना भरण-पोषण करता है। पढ़ाई के साथ-साथ वह लगातार खेलकूद में हिस्सा लेती रही है। पटना के गर्दनीबाग स्कूल से जलेबी दौर, पेंटिंग सहित कई प्रतियोगिताओं में मेडल और शील्ड जीते, लेकिन अब आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बाधित होने की आशंका है।

तनु की उम्र लगभग 15 वर्ष है और फिलहाल उसका पूरा ध्यान फरवरी में होने वाली मैट्रिक की परीक्षा पर केंद्रित है। तनु अपने पांच भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उसकी मां शोभा देवी ने बताया- “वह अपने दोनों हाथ खोने के बाद भी काफी हद तक अपनी दिनचर्या खुद पूरा करती है। पढ़ाई लिखाई से समय बचने के बाद छोटे भाई बहनों को भी पढ़ना-लिखना सिखाती है। पढ़ाई से समय निकालकर वह खेलकूद और पेंटिंग में भी विशेष रूचि रखती है।’

पिता अनिल कुमार ने बताया- “अगर सरकार की तरफ से कुछ आर्थिक मदद मिलेगी तो वह भविष्य में बहुत कुछ कर दिखाएगी। इससे बिहार ही नहीं, देश का नाम भी गौरवान्वित होगा।’

2014 का वह हादसा तनु और उसके परिवार वाले आज तक नहीं भूल पाते हैं, जब खेल-खेल में उसने बिजली के एक रॉड को पकड़ लिया था। इसके कारण उसको दोनों हाथ गंवाने पड़े थे। उस वक्त तनु क्लास 4 की छात्रा थी। इसके बाद भी उसने हार नहीं माना और अपनी जिंदगी को फिर से शुरू करने की ठानी। उसने अपने हाथ के बदले पैर को ही अपना हाथ बना लिया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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