जिला अस्पताल..

बैसे तो जिला एटा आधुनिकता की और आँखो को बन्द करके भागे जा रहा है लेकिन कई एसे भी मुकाम है जहा लोगो को मौत भी आ जाये तो कोई गुरेज ना होगा.
जब आप शरीर से परेशान हो और एक अदद मदद की जरूरत होती हैं तो आप को अस्पताल मे बैठे सरकारी भगवान के सिबा कुछ भी नहीं दिखाई देता है.लेकिन जब यही सरकारी भगवान अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड रहे हो और कह देते हो कि हम कुछ नहीं जानते है सरकार जाने तब मेहसुस होता है कि इन सभी सरकारी भगवानो को एक गाडी मे भर कर सीरिया या अफ़गान मे छोड़ कर आये क्युकि ये भारत मे रहते इतने निक्कमे और दुर्भाग्यपुर्ण हो चुके हैं कि मनुश्यो के बीच मे रहने का इन्हे कतई अधिकार नहीं है.
आज सुबह से…..
जिला अस्पताल मे लम्बी लम्बी कतार थी और दवाये लिखाई जा रही थी! दुसरी तरफ़ कुछ मरीज सीढियो की तरफ़ भागे जा रहे तो कुछ निराश होकर सीढियो से नीचे आ रहे थे.जब हमने निराश होने की वजह जानी तो बताया गया कि ब्लड टेस्ट ही नहीं हो रहा है तो फ़िर दवा कौन और केसे लिखेगा लेकिन भगवान तो भगवान ठहरे दवा भी लिख रहे थे और बिना ब्लड टेस्ट के. बैसे अमुमन देखने को मिलता है कि ये MBBS MD भगवान बिना ब्लड टेस्ट के तो हाथ भी नहीं छूते है. परंतु इन भगवान से बड़े वाले भगवान CMS सहाब ने कह दिया है कि दवा लिखते जाओ.कौन सा तुम जहर लिख रहे हो.. सो म….. जायेगे
सबाल तुमसे प्रशासन
पूरा प्रशासन लाखो रुपये किस वजह से तन्खा के रुप मे लेता है कि जनपद का मरीज अपनी जिन्दगी के लिये भी तुम्हारी आस लगाये बैठे.CMS एटा को तो अपनी नौकरी छोड़ देनी चाहिए क्युकि जब आप अपने काम व पद की महत्वता नही समझ पा रहे हैं तब आपको इस कुर्सी से पद त्याग देना चाहिये.
जनप्रतिनिधि तुम्हारी चुप्पी काला इतिहास लिखेगी
जिले की जनता से चुने गए प्रतिनिधि एक दिन आयेगा और ये जनता तुम्हारे इतिहास को काले शब्दो से लिखेगी.क्युकि तुम्हारी दरवाजे के पीछे की दलाली को जनता भी देख रही है और कलमकारो की कलम भी.
जनपद एटा की जनता भी जान गयी है कि आपका अब जनता से सरोकार नही रहा है बस मर रहा है उसे मरने दो के सिद्धांत को अमलीजामा पहना रहे हो.