अफगानिस्तान में हजारों पर भोजन संकट, *तालिबान के कब्जे स जिलेमुक्त अफगानिस्तान में हजारों पर भोजन संकट, *तालिबान के कब्जे से 3 जिले* मुक्त

【knlslive】अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही मुल्क में संकट का दौर शुरू हो गया है लेकिन एक संकट ऐसा भी है जो तालिबान के कब्जे से पहले से ही था और अब यह और गहराता जा रहा है । दरअसल अफगानिस्तान में लोगों के सामने खाने का संकट खड़ा होता दिख रहा है । हालात भुखमरी जैसे हो चले हैं । यूएन फूड एजेंसी के मुताबिक उसने तालिबान से समझौता कर अफगानिस्तान के एक राज्य में खाने की डिलवरी शुरू कर दी है लेकिन 3 प्रांतीय राज्य अब भी ऐसे हैं जहां खाने की सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है । लगभग 1.4 करोड़ लोग इस संकट से जूझ रहे हैं । वहीं अफगानिस्तान में पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां पर बगावत भी शुरू हो गई है । कुछ गुट तालिबान के कब्जे से उनके इलाके छीनने की कोशिश में जुट गए हैं । इस बीच अफगान न्यूज का दावा है कि तालिबान के कब्जे से 3 जिले मुक्त करा लिए गए हैं हालांकि इस पर तालिबान की ओर से कुछ नहीं कहा गया है । Pajhwok अफगान न्यूज का दावा है कि अफगानिस्तान में अब्दुल हामिद दादगर ने तालिबान के कब्जे वाले अंद्राब बघलान के 3 जिलों को वापस मुक्त करा लिया है । हालांकि इस बारे में तालिबान की ओर से कुछ नहीं कहा गया है । ये शहर बघलान प्रांत के हैं । दूसरी ओर अफगानिस्तान के पंजशीर इलाकों में तालिबान के खिलाफ लड़ने के लिए पूर्व सैनिकों ने मोर्चा संभालना शुरू कर दिया है । इन सभी की अगुवाई अहमद मसूद कर रहे हैं, जो कि तालिबानियों को मात दे चुके अहमद शाह मसूद के बेटे हैं ।
दौरान इस्लामिक स्टेट ने तालिबान को बताया नकली जिहादी, कहा- अफगानिस्तान पर कब्जा अमेरिकी साजिश । खुद को इस्लामिक स्टेट यानि IS कहने वाले आतंकवादी संगठन ISIS ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को लेकर सवाल उठाए हैं । संगठन की तरफ से प्रकाशित होने वाली पत्रिका अल नाबा में इस पूरी प्रक्रिया को अमेरिका समर्थित बताया है । तालिबान और आईएस के बीच लंबे समय से तकरार चली आ रही है । इसी बात के सबूत लेख में भी देखने को मिले हैं । तालिबान ने बीते रविवार को ही काबुल में कब्जे के साथ अफगानिस्तान में अपनी जीत की घोषणा कर दी थी । IS ने अफगानिस्तान में तालिबान की सफलता का मजाक उड़ाया है साथ ही आरोप लगाया कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही देश को समूह के हाथों सौंप दिया गया । आतंकवादी संगठन ने तालिबान को नकली जिहादी बताया है और कहा है कि समूह अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है । IS ने दावा किया है कि अफगान आंदोलन में वास्तविक जिहाद या पवित्र युद्ध नहीं था । IS ने लेख के जरिये पूरे देश में शरिया कानून लागू करने की तालिबान की क्षमता पर सवाल उठाए हैं । तालिबान और IS के बीच विचारधारा को लेकर मतभेद हैं । अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में IS की मौजूदगी है । यह इलाका अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशिया को कहा जाता है । मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी संगठन ने तालिबान को मुल्ला ब्रेडले प्रोजेक्ट बताया है । दरअसल, इसका इस्तेमाल उन जिहादियों के लिए किया जाता है, जिन्हें अमेरिका अंदर से आंदोलन को अस्थिर करने के लिए नियुक्त करता है ।