जाते-जाते बहुत सारे सवाल छोड़ गया अब्बू.
एटा।कहते हैं कि जब एक नौजवान सेना मे भर्ती होता है तो अपने दोस्तो से फ़क्र होकर कहता है कि जब घर आऊगा तो अपने तिरंगे में लिपटा आना चाहूगा.

हाँ अरविंद चौहान उर्फ़ अब्बू अपने दोस्तो से यही कहता था और बही हुआ जो उसने अपने सोशल मीडिया प्लेट्फ़ोर्म पर लिखा था या फ़िर अपनी भर्ती के दौरान सोच रखा था |परंतु समय चक्र ने बहुत कुछ बदला लेकिन मौत को अरविन्द टाल ना सका.और यही एक आर्मी के जवान का भाग्य भी है!
बचपन से ही सेना का दीवाना था अरविन्द
अरविंद उर्फ़ अब्बू बचपन से सेना मे भर्ती होने के लिये बेताब था क्यूकि अरविन्द के बाबा और पिता भी सेना मे सेवा दे चुके थे तो वही अब्बू के बड़े भाई अरूण भी सेना मे सेवा दे रहे थे.जब पूरा परिवार ही सेना मे हो व परिवार मे माहौल भी देश के लिये मरने जीने का रहा हो तो कौन बच्चा सेना मे जाना नहीं चाहेगा.और ये मुराद भी अरविन्द चौहान की पूरी हो गई.
जब एक फ़ोन ने पिता की सारी दौलत फ़ीकी कर दी
8 अगस्त को शाम के करीब आठ बजे एक फ़ोन आया कि राजकुमार जी आपके बेटे अरविंद की मौत हो गई है.पिता का इतना सुनना था कि उधर से आर्मी के अफ़सर ने फ़ोन कट कर दिया व इधर पिता के लिये सब कुछ जीवन में कमा कमाया चला गया हो और घर मे एक मातम का माहौल हो गया.परिवार की तरफ़ से कई बार फ़ोन किये गये लेकिन आर्मी की तरफ़ से कोई जवाब नहीं दिया गया.शाम होते-होते रात हो गई व रात के बाद दिन आ गया लेकिन आर्मी का काफ़िला एटा तक आते-आते 10अगस्त की दोपहर हो गई थी.गाव के चारो दिशाओ मे लोगो ने अपने अरविंद को एक पल देखने के लिये पलक भर भी नहीं मारा था.
सारे गिले शिकवे यही छोड़ गया अब्बू
पिता बेसुध थे, तो भाई अरूण का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया था,जिधर भी देखा वही आँखो मे पानी ही पानी था.कुछ दोस्तो की आँखो ने रोना छोड़ दिया था.सिर्फ़ अरविंद तेरा नाम रहेगा….. के नारो से गले को भर रखा था.कुछ शिकवे जो दहलीज पर ही रह गये तो कुछ शिकायते किसी के दिलो मे रह गयी होगी. मगर अरविन्द अब किसी को सताने या रुलाने वाला नहीं था.वो तो माँ भारती की गोद मे समा चुका था.वो अपनी जिद का पक्का था तो तिरंगे मे ही आया…..कुछ सवाल शायद अपनी पत्नी के लिये छोड़ गया है जिसके शायद जवाब उस पत्नी को भी ना मिले.क्यूकि….!!!!
इस गमगीन माहौल मे…
अरविन्द को विदाई देने के लिये प्रशासन की तरफ़ से उपजिलाधिकारी अलंकार अग्निहोत्री व सी.ओ. सदर मो.इरफ़ान खान व थाना पुलिस बल के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ़ से सदर विधायक विपिन कुमार वर्मा डेविड व मारहरा विधायक वीरेंद्र लोधी,पूर्व सपा विधायक अमित गौरव यादव,पूर्व प्रधान असरोली सतीश वर्मा,बबलू चौहान आदि भारी संख्या मे जनता का हूजुम मौजुद रहा|
तेरा हुनर तो #बन्दुक की नोक से था..
फ़िर कैसे हार गया तू बारुद से..
रास्ते तुने बहुत देखे थे जिन्दगी मे..