
गोया के चुनांचे —-
एक जहरीली घास ---जो आपकी सांस में घुल रही है---
स्वस्थ्य होने के बाद जब अपने लॉन में टहल रही थी तो देखा –‘अरे!! लॉन में जगह -जगह गाजर घास निकल आई है । ये तो खतरनाक है , और तुरन्त खुरपी से सारी घास निकाल कर जला दिया ।
सोचा , आज अपने फेसबुक मित्रो से इसके बारे में जानकारी साझा कर लिया जाए ।
आजकल सांस के कष्ट ने और वायु प्रदूषण ने जीवन को दुश्वार बना दिया है ।
गाजर घास एक खरपतवार है, जिसका वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस (Parthenium hysterophorus) है. यह खरपतवार हूबहू गाजर के पौधों जैसी दिखती है. इसे कैरट ग्रास, और क्षेत्रीय भाषा में सफेद टोपी , चटक चांदणी आदि नामों से भी जाना जाता है. बहुत अधिक रूप से ये गाजर घास खाली स्थानों, बेकार पड़ी भूमियों , औद्योगिक क्षेत्रों, सड़क के किनारों, रेलवे लाइनों आदि पर पाई जाती है. किन्तु जानकारी के अभाव में हम इस ओर ध्यान नहीं देते कि प्रातः शुद्ध वायु के लिए भ्रमण करने हम जाते हैं तो उस हवा में गाजर घास का प्रदूषण भी शामिल है और हम धीरे धीरे अस्थमा के रोगी होते जा रहे हैं । इसका प्रकोप फसलों जैसे धान, ज्वार (Sorghum), मक्का, सोयाबीन, मटर तिल, अरण्डी, गन्ना, बाजरा, मूंगफली सब्जियों एवं उद्यान फसलों में भी देखा जा सकता है. इस खरपतवार से फसलों की पैदावार में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी हो जाती है. यह घास अनेक हानिकारक रासायनिक तत्व भी उत्सर्जित करती है जिससे विभिन्न फसलों के बीजों का अंकुरण नहीं हो पाता है.
गाजर घास पशु और मानव शरीर को भी नुकसान पहुंचाती है । गाजर घास खरपतवार के लगातार सम्पर्क में आने से मनुष्य को डरमेटाईटिस एल्जिमा , ऐलर्जी , बुखार, दमा (Asthma) जैसी गंभीर रोग हो जाती हैं. पशुओं के लिए यह खरपतवार बहुत ही अधिक विषाक्त है. इसके खाने से पशुओं में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं, और दुधारू पशुओ के दुग्ध में कड़वाहट भी आने लगती है.
इस खरपतवार के प्रवेश एवं फैलाव को रोकने हेतु नगर एवं राज्य स्तर पर कानून बनाकर उचित दण्ड़ का प्रावधान रख इस पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। सभी राज्यों को गाजर घास को अधिनियम के अन्तर्गत रखकर इसके उन्मूलन की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर करनी चाहिए ।
खरपतवारों के प्रवेश एवं उनके फैलाव को रोकने हेतु सख्त कानून बनाये गये हैं उनका सख्ती से पालन करना चाहिए व दण्ड का प्रवधान भी रखना चाहिये |
इस खरपतवार को फूल आने से पहले उखाड़ कर जला देना चाहिये ताकि इसके बीज न बन पायें व न ही फैल पायें | खरपतवार को उखाड़ते समय दस्तानों व सुरक्षात्मक कपड़ों का प्रयोग करना चाहिये | सामूहिक तौर पर अगर हम इकट्ठे होकर इसे नष्ट करें तो पार्को और काँलोनियों को भी हम साफ रख सकते हैं |
एक जागरूक नागरिक की तरह जिला प्रशासन , नगर पालिका , नगर निगम से शिकायत करिए ताकि वे इस गाजर घास को जड़ से खत्म करे ।
क्योंकि शुद्ध वायु का अधिकार आपको है ।
—डॉ निरूपमा वर्मा —