एल0आर0डिग्री कॉलेज जसराना में कंडिसनल/कार्यवाहक प्राचार्य
पद का दुरुपयोग कर हुआ रफू-चक्कर

एल0आर0डिग्री कॉलेज जसराना में कंडिसनल/कार्यवाहक प्राचार्य
पद का दुरुपयोग कर हुआ रफू-चक्कर।
जसराना,
जनपद फिरोजाबाद के एलआर डिग्री कॉलेज जसराना में लोधी समाज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ रामप्रकाश वर्णी ने लोधी समाज को कलंकित करने वाली घटना को राजनीतिक षड्यंत्रकार्यों के निर्देशन में एक निर्दोष प्राध्यापक प्रोफेसर सनिल कुमार को निलंबित कर घटना को अंजाम देकर रफूचक्कर हो लिए हैं ।यह पूरा प्रकरण पद और धन की लोलुपता के कारण किया गया है ।इस घटना के बाद से कॉलेज के स्टाफ, छात्र/ छात्रा,अभिवाबको ने डॉ रामप्रकाश वर्णी के खिलाफ आंदोलन करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं ।और प्रोफेसर एस0कुमार की बहाली के लिए ज्ञापन और उच्चाधिकारियों से संपर्क किए हुए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कंडीशनल /कार्यवाहक प्राचार्य डॉ रामप्रकाश वर्णी जो कि लोधी समाज से हैं और यह मूल निवासी ग्राम लोदीपुर थाना अमांपुर जनपद कासगंज के रहने वाले हैं ।इनकी नियुक्ति संस्कृत विभाग में एल0आर0 डिग्री कॉलेज जसराना में हुई है। यह महानुभाव कुछ राजनीतिक षड्यंत्रकारीयो की टीम में पहले से शामिल हैं। जो जसराना में लोगों को अपनी राजनीतिक रूप से षड्यंत्र के तहत झूठे आरोप प्रत्यारोप के सहारे अपने राजनीतिक प्रतिदुनदियो को अपनी लाइन से हटाने का खेल पिछले 20-25 बरसों से खेलते चले आ रहे हैं। यह षड़यंत्रकारियो की टीम कई एक हत्याकांड में भी शामिल रह चुकी है ।सही वक्त आने पर इनकी गहनता से जांच हो ,तो पुनः गड़े मुर्दे उखाड़ने में कतई देर नहीं लगेगी ।यहां यह बता दें कि दिनांक 7 सितंबर 1988 को एलआर डिग्री कॉलेज जसराना में है ।डॉ अनिल कुमार ने अंग्रेजी विभाग में तथा डॉ0 रामप्रकाश वर्णी ने संस्कृत विभाग में नियुक्त पाई थी ।इसी के साथ ही आगामी समय में डॉ एस0कुमार का विनियमितीकरण 17 जून 1992 को हुआ और डॉ0रामप्रकाश वर्णी का विनियमितीकरण 20 जून 1992 को हुआ। इसमें विनियमितीकरण की दिनांक ही नियुक्ति दिनांक मानी जाती है ।इस आधार पर प्रोफेसर सनिल कुमार वरिष्ठ प्राध्यापक की श्रेणी में आते हैं ।इसी प्रमोशन को रोकने के लिए प्रोफेसर सनिल कुमार को राजनीतिक षड्यंत्र कारीर्यों ने डॉ रामप्रकाश वर्णी को अपना मोहरा बनाकर कंडिसनल/कार्यवाहक प्राचार्य बनाकर डॉ0 सनिल कुमार कोवरिष्ठता क्रम से रोकने हेतु जुलाई 2020 को वरिष्ठ/ क्षेत्रीय राजनीतिक षड्यंत्रकारीर्यों की गतिविधियों के चलते डॉ राम प्रकाश वर्णी को एक नए पद का सृजन करते/ कराते हुए कंडीशनल/ कार्यवाहक प्राचार्य पद पर आसीन किया गया ।इसके पीछे का रहस्य यह था कि राजनीतिक षड्यंत्रकारी अपने मकसद में सफल हो ,इसके लिए वरिष्ठताक्रम का सिलसिला जारी रहा और डॉ0सनिल कुमार व डॉ रामप्रकाश वर्णी अपनी वरिष्ठतम माननीय कुलपति जी डॉ0 बी आर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के यहां प्रत्यावेदन देकर निस्तारित कराएं वरिष्ठता सूची में असफल रहने के कारण डॉ रामप्रकाश वर्णी विद्वेष भावना से 10 अप्रैल 2021 को रामप्रकाश वर्णी ने स्वयं को कार्यवाहक प्राचार्य,संयुक्त सचिव के पद पर नाम का दुरुपयोग तथा पद का दुरुपयोग और जालसाजी करते हुए माननीय न्यायालय की रूलिंग के विपरीत बिना मान सम्मान की चिंता किए बिना योजनाबद्ध तरीके से राजनीतिक षड्यंत्र कार्यों के निर्देशन में डॉ0सनिल कुमार को निलंबित कर दिया ।जबकि कार्यवाहक प्राचार्य को निलंबन करने का कोई अधिकार ही नहीं है। इसके इतर डॉ रामप्रकाश वर्णी स्वयं को संयुक्त सचिव लिखना, जालसाजी की परिधि में आता है ।
इस प्रकार इस प्रकरण में प्रोफेसर सनिल कुमार से वार्ता के अनुसार उन्होंने बताया कि डॉ रामप्रकाश वर्णी और राजनीतिक षड्यंत्रकारी ,उनकी सामाजिक छवि धूमिल करने ,उनका अपमान करने तथा अपने पद का दुरुपयोग कर डॉ रामप्रकाश वर्णी ने माननीय न्यायालय की रूलिंग व्यवस्था और संविधान का भी अपमान किया है। यहां यह बता दें कि रामप्रकाश वर्णी स्वयं को संयुक्त सचिव लिखकर जालसाजी में स्वयं फस गए हैं ।क्योंकि प्रबंध समिति के पत्रांक संख्या 253/ 2012 दिनांक 28,05, 2012 में कार्यवाहक प्राचार्य एवं पदेन सदस्य होता है। अपने आप को संयुक्त सचिव लिखना, जालसाजी की परिधि में आता है ।जबकि वरिष्ठता संबंधी विवाद में शिक्षा निदेशक, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आगरा ,कुलपति महोदय आगरा विश्वविद्यालय आगरा, माननीय उच्च न्यायालय ,माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने तथा पूर्व कुलपति माननीय श्री भूमित्र देव ने भी विनियमितीकरण के पत्र के निर्गमन की तिथि को ही ,मौलिक नियुक्ति माना है ।इस प्रकार डॉ0 सनिल कुमार ही वरिष्ठ प्राध्यापक थे और हैं ,किंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि इस कोरोना महामारी जैसी वैश्विक समस्या को अनदेखी करते हुए, अमानवीय ढंग से राजनीतिक षड्यंत्रकारीर्यों के इशारे पर डॉ रामप्रकाश वर्णी ने लोधी समाज को कलंकित करते हुए योजनाबद्ध तरीके से फर्जी मौहरऔर पद संयुक्त सचिव का दुरुपयोग करते हुए ,जालसाजी करके एक निर्दोष प्रोफेसर अनिल कुमार को निलंबित कर दिया। ताकि वह प्राचार्य पद के चार्ज में ना आ सके। लेकिन एक कहावत है कि “जाको राखे साइयां मार सके ना कोय”कॉलेज स्टाफ और छात्र, क्षेत्रीय लोगों में ईमानदार छवि के निर्दोष प्रोफेसर सनिल कुमार का जनता के दिलो-दिमाग़ में कद और बढ़ गया है।दूरभाष पर लोग उनके हालचाल पूछ रहे हैं और उन्हें हौशला दे रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या प्रोफेसर सनिल कुमार को न्याय मिल पाएगा और राजनीतिक षड्यंत्रकारीर्यों की इस घिनौनी हरकत का खुलासा हो पाएगा या नहीं ,विचारणीय प्रश्न बनकर गया है तथा जनता जनार्दन के जेहन में यह बात गूंज रही है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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