
2724 गोवंशों को गोआश्रय स्थलों में संरक्षित कर उनकी देख-भाल एवं संरक्षण प्रदान किया जा रहा है- मुख्य पषु चिकित्सा अधिकारी
संरक्षित गोवंशो के भरण-पोषण के लिए जनपद में की गयी 23 भूसा बैंक की स्थापना- मुख्य पषु चिकित्सा अधिकारी डा0 अनिल कंसल
गोवंषो की चिकित्सा, सुरक्षा व भरण-पोषण के लिए पशुपालन विभाग कटिबद्ध-सीवीओ
पशु चिकित्सक व प्रषासनिक अधिकारी निरंतर करते है गौ आश्रयस्थलो का निरीक्षण- मुख्य पषु चिकित्सा अधिकारी
जनपद मेरठ में निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश को संरक्षित किए जाने के उद्देश्य से 24 गो-आश्रय स्थलों की स्थापना एवं संचालन का कार्य करते हुए 3927 गोवंश को अस्थायी/स्थायी गोआश्रय स्थलों में संरक्षित किया जा चुका है। मा0 मुख्यमंत्री जी की गोवंश सहभागिता योजनान्तर्गत गो-प्रेमियों के सहयोग लेते हुए गोवंशों को सुपुर्दगी में देने के उपरांत वर्तमान में कुल 2724 गोवंशों को गोआश्रय स्थलों में संरक्षित कर उनकी देख-भाल एवं संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।
यह जानकारी मुख्य पषु चिकित्सा अधिकारी डा0 अनिल कंसल ने दी। उन्होने बताया कि संरक्षित गोवंश को समुचित सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके भरण-पोषण हेतु स्थानीय स्तर पर भूसा की व्यवस्था ससमय करना एक प्राथमिकता है ताकि गोवंश को समय पर भोजन उपलब्ध हो सके तथा उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ें।
मुख्य पषु चिकित्सा अधिकारी डा0 अनिल कंसल ने बताया कि शासन द्वारा समय समय पर दिए गये महत्वपूर्ण निर्देशों के क्रम में जनपद में गेंहू की कटाई के समय युद्ध स्तर पर 23 भूसा बैंक की स्थापना की गयी है। भूसा बैंक की स्थापना के समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि आगामी वर्षा ऋतु के समय पानी से भूसा किसी भी दशा में खराब न हो।
मुख्य पषु चिकित्सा अधिकारी डा0 अनिल कंसल ने बताया कि प्रत्येक गोआश्रय स्थल पर प्रतिदिन की भूसे की आवश्यकता के अनुसार निर्गत करने एवं उसके अभीलेखीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनपद में स्थापित 23 भूसा बैंक में कुल 3266 कुन्तल भूसे का भण्डारण किया गया है जिसमें से 2316 कुन्तल राज्य सरकार से प्राप्त होने वाली गोवंश के भरण-पोषण की धनराशि से क्रय किया गया है तथा 950 कुन्तल विभिन्न कल्याणकारी संस्थाओं एवं अन्य दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराया गया है ।
मुख्य पषु चिकित्सा अधिकारी डा0 अनिल कंसल ने बताया कि जनपद में गोवंश के भरण-पोषण हेतु पर्याप्त मात्रा में भूसे की उपलब्धता है तथा स्थानीय स्तर पर हरे चारे की उपलब्धता हेतु भी कार्य किए गये है। जनपद में गोवंश के संरक्षण हेतु किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं है। यह भी अवगत कराना है कि पशुपालन विभाग के समस्त पशुचिकित्साविद् निरन्तर गोवंश की चिकित्सा व्यवस्था हेतु तत्पर है तथा साथ ही स्थानीय प्रशासन द्वारा भी समय-समय पर गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं।