
बरेली: सिकल सेल डिजीज (SCD) एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है, जो दुनिया भर में हजारों बच्चों और वयस्कों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में रेड ब्लड सेल्स सामान्य रूप से मुलायम और गोल होने के बजाय कठोर होकर दरांती (सिकल) या अर्धचंद्राकार आकार की हो जाती हैं। किसी भी प्रकार के शारीरिक तनाव या संक्रमण की स्थिति में ऐसी असामान्य सेल्स की संख्या बढ़ जाती है और ये छोटी ब्लड वेसल्स में ब्लड फ्लो को बाधित कर देती हैं। इसके कारण मरीज को तेज दर्द, एनीमिया, बार-बार संक्रमण, अत्यधिक थकान तथा फेफड़ों, किडनी, मस्तिष्क और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान हो सकता है।
कई परिवारों का मानना है कि सिकल सेल डिजीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इस धारणा को बदल दिया है। आज बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT), जिसे हेमाटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट भी कहा जाता है, सिकल सेल डिजीज से पीड़ित कई मरीजों के लिए संभावित रूप से पूर्ण उपचार का विकल्प प्रदान करता है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के हीमैटो-ऑन्कोलॉजी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. सत्येंद्र कटेवा ने बताया “बोन मैरो हमारी हड्डियों के भीतर मौजूद वह मुलायम ऊतक है, जहां रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान उन अस्वस्थ स्टेम सेल्स को हटाकर स्वस्थ स्टेम सेल्स प्रत्यारोपित किए जाते हैं, जो सिकल आकार की रेड ब्लड सेल्स बना रहे होते हैं। जब ये नई स्वस्थ कोशिकाएं मरीज के शरीर में विकसित होने लगती हैं, तो वे सामान्य, मुलायम और गोल लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। इससे सिकलिंग की प्रक्रिया और उससे जुड़ी जटिलताओं को पूरी तरह रोका जा सकता है। आमतौर पर पूरी तरह मैच करने वाला भाई या बहन सबसे उपयुक्त डोनर माना जाता है।
डॉ. सत्येंद्र ने आगे बताया “बोन मैरो ट्रांसप्लांट मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है। जो बच्चे पहले बार-बार दर्द के दौरे, रक्त चढ़ाने की आवश्यकता, अस्पताल में भर्ती होने और संक्रमण जैसी समस्याओं से जूझते थे, वे सफल ट्रांसप्लांट के बाद अधिक स्वस्थ, सक्रिय और सामान्य जीवन जी सकते हैं। इसके अलावा, समय रहते किया गया ट्रांसप्लांट बीमारी के कारण होने वाले दीर्घकालिक अंग क्षति के जोखिम को भी कम कर सकता है। हालांकि, किसी भी बड़े उपचार की तरह बोन मैरो ट्रांसप्लांट से जुड़े कुछ जोखिम भी होते हैं और इसके लिए अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक होता है।

सिकल सेल डिजीज को जीवनभर का बोझ मानकर स्वीकार करना आवश्यक नहीं है। आधुनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट तकनीकों ने इस बीमारी के उपचार की वास्तविक संभावना को मजबूत किया है। जागरूकता, समय पर पहचान और शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श की मदद से प्रभावित बच्चे और उनके परिवार एक स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।