यूपीएटा-जब घरों मे बंद है,आवाम तो खाली जगहों का रोज सेनिटाइजर दवाओं आदिका छिड़काव क्यों नहीं होता है जो वायरस बेअसर हो—

#यूपीएटा-जब घरों मे बंद है,आवाम तो खाली जगहों का रोज सेनिटाइजर दवाओं आदिका छिड़काव क्यों नहीं होता है जो वायरस बेअसर हो—
कोरोना वायरस आवाम की जिंदगी पर कहर बनकर बरष रहा है,इस आपदा से इंसान अकेले की लड़ रहा है,तब मुशीबत की इस घड़ी मे शासन, प्रशासन को उन कालोनियों,का विशेष ध्यान रखना चाहिये जहां इस वायरस की चपेट मे बीमार ज्यादा है, उस जगह को चिंहनित करके कोलोनियों को रोजाना सेनिटाइजर दवाओं आदि का छिड़काव अति आवश्यक है,ताकि मरीज और सुरक्षित आवाम इस वायरस की चपेट से बचें और मरीज और सुरक्षित आवाम पर वायरस का असर भी कम हो, लेकिन शहर मे एसी कोई ब्यबस्था नही हो रही है,मरीज और सुरक्षित आवाम खुद या खुदा के भरोसे छोड़ दिये गये है,तब घरों मे बंद करके आवाम सुरक्षित रह जाएगी, या उनकी आवश्यकताऔ की पूर्ति—-ये आवाम की बेबशी पर शर्मनाक ब्यबस्था है,शुर्खियों मे सबकुछ अच्छा दिखाया जाना जस्ट उसके उल्टा हो रहा है,यही कारण है कि वायरस हमारे बीच मे रहकर सालों से नये-नये अवतार मे इंसानों का निवाला बना रहा है,बात कटु सत्य है,नई ताजपोशी ने हर पार्टी को बेरहम बना दिया है,बात होती है तो सिर्फ ताजपोशी या वोट की गोट एक दूसरे मे नुस्ख निकालने की, तबाही पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है परिणाम आज समाज रोगग्रस्त बना दिया एक दूसरे की टांग खिचाई ने जबकि ऐसी आपदाऔ मे देशको एक साथ रहकर सामना करना चाहिये पर नहीं, परिणाम आज घर बच्चे परिवार गरीब लावारिस की तरह तबाही की सुनामी से जिंदगी की प्रदूषित साँसें इंसान,भूखा प्यासा बटोर रहा है,महंगाई तो देखो जो करोड़पतियों के बैठे बिठाए खाने मे छक्के छुड़ा रही है तो आम आदमी जीकर कोरोना से भी भयंकर मार सह रहा है,बस सबसे बड़ा इलाज ढूंढ़ लिया है,बिना सुरक्षा सुविधा के घरों मे कैद रहो समाज के कुछ ठेकेदारों को बाहर छोड़ दिया है जाओ बारी बारी से इस वायरस का शिकार——पुलिस, कर्मचारी, डॉक्टर, दैनिक बस्तुऐं आदि की ब्यबस्था करने बालेआदि को,कर्फ्यू के बाद क्यों नही खाली सड़कों, बाजारों, कालोनियों, मे सेनिटाइजर, प्रतिदिन होता है जो वायरस बेअसर और खत्म हो बस लोकडाउन सबसे बड़ा इलाज है,चारदीवारी के अंदर की तबाही कोरोना से बड़ी बेरोजगारी भूँख,सामने आ रही है,कोई लेना देना नहीं है,आंकड़े कोरोना का ग्राफ गिर रहा है,जब बंद घरों मे आदमी पड़ा है,तो आप ग्राम कहां का नाप लाते हो,सच तो यह कि कोरोना आया है तबसे और बीमारियों को पूरी तरह हमने इग्नोर कर दिया है,जबकि कोरोना की तबाही से हार्ट अटैक,और बेरोजगारी बेबसी जैसे रोग इंसान पर बुरी तरह हावी हो गया है जिसके न कोई आंकड़े है न इंतजाम।
कैसी बेबशी है इंसान के आगे,
न हाथ मिला सकते न कंधा दे–
चंद रोटियां है मानवता के पास,
बच्चों का निवाला दे नहीं सकते,,

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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