शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्तियों में आरक्षण लागू न करने पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा एवं जबाब तलब किया ।

शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्तियों में आरक्षण लागू न करने पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा एवं जबाब तलब किया ।
????विधिविभाग (ला मंत्रालय) ने शासकीय अधिवक्ताओ को लोकपद मानने से इंकार करते हुए, नियुक्तियों में आरक्षण लागू नही किए जाने के आदेश की वैधता को दी गई थी चुनोती।
????ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका स्वीकार की हाई कोर्ट ने सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में आरक्षण क्यों नही दिया जा रहा है : सरकार चार हप्ते में जबाब प्रस्तुत करें ।
जबलपुर 19 मार्च 2021:- याचिका क्रमांक WP no. 19492/2020 के याचिकाकर्ता ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा मध्यप्रदेश सरकार के उस आदेश की वैधानिकता को चुनोती दी गई है जिसमे सरकार ने कहा था कि सरकारी वकील का पद लोक पद की परिभाषा ने नही आता इसलिए इसमें आरक्षण नियमो का लागू किया जाना संभव नही है । एसोसिएशन ने उक्त आदेश कीसंवैधानिकता को चुनोती दी है , याचिका कीदिनांक 19/03/21 को प्रारंभिक सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति श्री विशाल धगट के समक्ष तर्क दिए गए कि अरक्षण अधिनियम की धारा 2 में स्पष्ट रूप से लोक सेवक एवं लोक पदों को परिभाषित किया गया है जिसके अंतर्गत शासकीय अधिवक्ताओ का पद लोक सेवक एवं लोक पद माना गया है । एडवोकेट्स वेलफेयर द्वारा पूर्व में भी याचिका क्रमांक 7660/2020 दायर की गई थी जिसमे हाईकोर्ट ने दिनांक 4/9/2020 को आदेश पारित कर सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में आरक्षण देने हेतु पर विचार करने का सरकार को आदेशित किया गया था लेकिन मध्यप्रदेश प्रदेश सरकार द्वारा दिनांक 7/11/2020 को आदेश जारी कर सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में आरक्षण से साफ इंकार कर दिया गया है जो संविधान के अनु. 14,15 एवं 16 का उल्लंघन है । यह भी तर्क दिया गया कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में विगत 30 वर्षों से अधिकांशतः सरकारी वकीलों को ही हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्ति की जाती है, उच्च न्यायालय में आजादी से आज दिनांक तक किसी भी एससी/एसटी एवम ओबीसी को एडवोकेट कोटा से हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्ति नही मिल सकी इसका प्रमुख कारण आरक्षण नियमो का विधिवत लागू नही होना है । उक्त समस्त तर्कों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के उक्त कृत्य को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए 4 हप्ताह के अंदर जबाब दाखिल करने का आदेश दिया गया ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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