
बरेली। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी अविनाश सिंह के बेहद सख्त तेवर देखने को मिले। डीएम ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि गैंगस्टर एक्ट, एनडीपीएस और महिला अपराधों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत में पैरवी इतनी मजबूत होनी चाहिए कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
इस उच्चस्तरीय बैठक में डीएम अविनाश सिंह ने अभियोजन अधिकारियों और शासकीय अधिवक्ताओं के काम की बारीकी से समीक्षा की। समीक्षा के दौरान जब यह सामने आया कि विभिन्न मामलों के चयनित ‘टॉप-10’ केसों में से किसी में भी सजा नहीं हो सकी, तो जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई।
डीएम ने सख्त निर्देश दिए कि अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं चलेगी। हर मुकदमे में की जा रही पैरवी और प्रदर्शन का ठोस डेटा पेश करना होगा, जिसके आधार पर ही परफॉर्मेंस तय की जाएगी।
एनडीपीएस मामलों में सजा न होने पर डीएम ने चिंता जताई और कहा कि मजबूत साक्ष्यों के दम पर पैरवी की जाए। साथ ही, जिन मामलों में जमानत मिली है, उसके कारणों का ब्योरा तलब किया गया है।
जिन मामलों में गवाह पक्षद्रोही (होस्टाइल) हो रहे हैं, उनमें कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएं।
अपील में न हो देरी: जिन मुकदमों में फैसला पक्ष में नहीं आया, उनमें तुरंत ऊपरी अदालत में अपील दाखिल करने के निर्देश दिए गए।
गैंगस्टर और महिला अपराध: गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज सभी मुकदमों की अलग रजिस्टर में अनिवार्य एंट्री और धर्मांतरण व महिला अपराध से जुड़े मामलों की दिन-प्रतिदिन मॉनीटरिंग के आदेश दिए गए।
बैठक में अपर जिलाधिकारी नगर अविनाश त्रिपाठी सहित तमाम शासकीय अधिवक्ता मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि पैरवी में लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय होगी और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।