महाप्रभु जगन्नाथ की लीला देख भाव-विभोर हुए श्रद्धालु ; मंचन में दिखा पुरी धाम का अलौकिक रहस्य

बरेली। श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में चल रहे भव्य रासलीला एवं भक्ति लीला महोत्सव के सातवें दिन मंगलवार को वृंदावन से पधारे स्वामी देवकीनंदन जी महाराज की मंडली ने ‘प्रभु जगन्नाथ जी की महिमा’ का सजीव और भावपूर्ण मंचन किया। मंच पर जीवंत हुए पुरी धाम के इतिहास और चमत्कारों को देख पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया।

​राजा इंद्रद्युम्न की भक्ति और भगवान विश्वकर्मा की शर्त

कथा प्रसंग प्रस्तुत करते हुए स्वामी देवकीनंदन जी महाराज ने बताया कि सतयुग में मालवा के परम विष्णु भक्त राजा इंद्रद्युम्न ने 1,000 अश्वमेध यज्ञ कर भगवान का विशाल मंदिर बनवाया। प्रभु ने स्वप्न में दर्शन देकर समुद्र में तैरते काष्ठ (लट्ठे) से विग्रह निर्माण का आदेश दिया। इसके बाद स्वयं देवशिल्पी विश्वकर्मा एक वृद्ध बढ़ई के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने 21 दिनों तक बंद कमरे में अकेले कार्य करने की शर्त रखी।

​17वें दिन खुला द्वार और प्रकट हुआ अधूरा अलौकिक रूप

शर्त के अनुसार कार्य जारी रहा, लेकिन 17वें दिन भीतर से कोई आहट न आने पर व्याकुल होकर रानी के आग्रह पर राजा ने कक्ष का द्वार खुलवा दिया। द्वार खुलते ही बढ़ई रूपी विश्वकर्मा अंतर्ध्यान हो चुके थे और काष्ठ की मूर्तियां आधी अधूरी—बिना हाथों के—विद्यमान थीं। तभी आकाशवाणी हुई कि प्रभु इसी निराकार-साकार स्वरूप में पूजे जाएंगे। राजा ने प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के इसी पावन विग्रह को रत्नवेदी पर स्थापित कराया।

​विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा और जगन्नाथ पुरी की रसोई का चमत्कार

महाराज जी ने बताया कि ओडिशा के नीलांचल (पुरी) धाम में विराजमान प्रभु ब्रह्मांड के स्वामी हैं। आषाढ़ माह में निकलने वाली विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा में प्रभु स्वयं भक्तों को दर्शन देने सड़क पर आते हैं; मान्यता है कि प्रभु का रथ खींचने वाले को सीधे मोक्ष प्राप्त होता है। इसके साथ ही उन्होंने पुरी की दुनिया की सबसे बड़ी रसोई का रहस्य उजागर करते हुए बताया कि यहाँ एक के ऊपर एक रखे मिट्टी के पात्रों में बनने वाला ‘महाप्रसाद’ रोग और पापों का हरण करने वाला दिव्य अमृत है।

​व्यवस्था एवं उपस्थिति

मीडिया प्रभारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि मंगलवार के कार्यक्रम के मुख्य यजमान राजू खंडेलवाल, विकास सिंघल, संजय अग्रवाल, सुनील गुप्ता, राजेश मालपानी और दिलीप खंडेलवाल रहे। आयोजन को सफल बनाने में जुगल किशोर साबू, मोहन गुप्ता, विकास शर्मा, कैलाश शर्मा, प्रेम शंकर अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, नवीन गोयल, समित अग्रवाल, संजय अग्रवाल, निरंकार ओबेरॉय, सत्य प्रकाश ओबेरॉय, शिव कुमार सिंह, विपिन सक्सेना, रिंकू और शुभम का विशेष सहयोग रहा।

​कल का आकर्षण:

बुधवार को मंच पर प्रसिद्ध भक्त चरित ‘नानी बाई का मायरा’ (भक्त नरसी मेहता प्रसंग) की लीला का मंचन सायं 6:00 बजे से 9:30 बजे तक किया जाएगा।

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पं.सत्यम शर्मा

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