
एटा-थाना निधौलीकलाँ क्षेत्र के गांव चंन्द्रभानपुर
नगला खरैटी के युवक सत्यवीर की मृत्यु होने के बाद लाश पर राजनीति होने लगी।सत्यवीर के थाने जाने आने और पुलिस प्रताणना के बीच उसी गांव के एक बकील साहब भी इस घटना की कडी मे जुड गये।पुलिस से खफा बकील साहब ने मृत्योपरान्त आर्थिक सहायता हेतु पुलिस पर दबाव बनाते हुये ताना बाना बुन दिया।और परिजनों ने लाश को ट्रक्टर मे रख एस.एस.पी कार्यालय के सामने गेट पर रख दिया।पुलिस प्रताडना से हुई मौत की खबर सपा नेता पहलवान रामसेवक राजपूत को लगी जो तत्काल कार्यालय पर परिजनो की हमदर्दी व सहयोग मे कूद पडे।नतीजा घन्टे भर चली जद्दोजहद के बाद कार्यवाही के भरोसे के बाद शव मोर्चरी पर पहुंचा।वहाँ एटा सदर विधायक बिपन बर्मा डेविड भी पहुँच गये।जिन्होंने बीस लाख की आर्थिक मदद के लिये पत्र लिख दिया।परिणाम भाजपा के दूसरे खेमा मारहरा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी को पूरे घटना चक्र एव राजनीति का पता चला तो वह दूर जिले से कार्यक्रम छोडकर शव दाह मे शामिल हो गये। पूरे घटनाक्रम को साँसद राजवीर सिंह के संज्ञान मे डाल दिया।जिसके परिणाम स्वरुप मंत्री संदीप सिंह का भी पीडित जनों से मिलना हुआ।पीडत परिजनों से सपा साँसद सहित तमाम सपाई,बसपाई,के अलावा किसान यूनियन टिकैत किसान यूनियन अखिल कैलाश लोधी गगन राजपूत आदि लोग मिले जिनके पास सत्ता पक्ष सरकार को कोसने के अलावा कुछ नही।केवल न्याय की लडाई मे साथ खडे है।अब बात करते है सत्ता पक्ष और खासकर सजातियों, जिनमें मारहरा विधायक वीरेन्द्र सिह लोधी,एटा सदर विधायक बिपन बर्मा लोधी, राजू भैया पूर्व साँसद, साक्षी महाराज, तथा मौजूदा साँसद देवेश शाक्य ये सभी एक दो करोड नही बल्कि सैकडों और कुछ हजारों करोड़ की हैशियत समाज मे बखानते है।सच्चाई भी है।लेकिन इनकी मानसिकता समाज देख रहा है।कि पीडित को आर्थिक मदद मे किसी पर फूटी कौडी जेब से नहीं निकली।पीडित परिवार के साथ पूरा गाँव तथा जिला टकटकी लागाये था कि फलाने साहब ढिकाने साहब आये तो कुछ मिलेगा।लेकिन उलट मे भरोसा मिला।जिसे वह गरीब ओढे या विछाये?
जाति के नाम पर राजनीति करने बाले छुटभैय्ये बडे परेशान है।ये बेचारे दिन रात इन विरादरी के नेताओं के आगे पीछे इतने घूमते है कि घरेलू काम भी पिछड जाता था।इन्हें ये लगता था कि यदि उनके साथ कोई अन होनी हुई तो ये सजातीय उनके परिजनो को मालामाल कर देंगे।लेकिन सत्यवीर की मौत से इनके ख्वाबों की मौत नजर आ रही है।एक बात की चर्चा खूब होने लगी कि ये सभी सजातीय नेता दिन रात अपनी तिजोरियों को भरने मे लगे है।ये बेचारे सरकार से मदद दिलायेंगे खुद पर फूटी कौडी नही है।खास बात तो ये है कि जाति के सात पीढियों तक उद्धार करने हेतु एक दूसरे की प्रतिस्पर्धा मे संगठन खडे कर दिये।जो कई प्रान्तों मे एक दूसरे संगठन से बडा हितैशी होने का दावा करते है।जबकि जनपद मे एक मात्र हुई अनहोनी मौत के पीडित खाली हाथ बैठे है।जबकि हर नेता से पीडित परिवार के हितैषी आर्थिक सहायता हेतु खुलकर मांग की गयी।लेकिन हाथ खाली ही रहा।अब देखना है कि आखिर इन नेताओं का जमीर जगेगा या यूं ही घडियाली आसुओं से घर भरेंगे।
पत्रकार जसवन्त सिंह यादव