गुमसुदा सा इतिहास जिन्दा सी हो गई नमाज!

देश की सत्ता में 2014 से बदलाव देखने को मिल रहा है यह हो भी क्यों न, क्योंकि हर सत्ताधारी पार्टी की विचारधारा अपनी- अपनी है। बीजेपी की विचारधारा भी अपनी ही है क्योंकि विचार के बदलने में बीजेपी भी सबसे ऊपर रहने वाली पार्टी हो गई है यह इसलिए भी कह रहें है क्योंकि RSS के मुख्यालय से जन्मी जनसंघ और आज की बीजेपी ने कई उतार चढ़ाव देखने के बाद अपनी बात रखने और उस पर चलने के लिए माप दंड अपने हिसाब से तय करने शुरू कर दिए है।

सत्ता आती है सत्ता जाती है, कुर्सी पर बैठने वाले बदल जाते है और कुर्सी आज भी वही है।

बदलता सत्ता का नशा

2014 के बाद देश की राजनीती में हिन्दू -मुस्लिम कोई नई बात नहीं है आज से दो सौ बर्ष पूर्व मुस्लिम समाज ने हिन्दू की भावनाओं को आहत किया था तब कारतूस में गाय की चर्वी अंग्रेज के कहने पर भरी गई थी तो आज मुस्लिम गाय को अपना भोजन बोल रहा है और जमकर धंधा भी कर रहा है. लेकिन यह धंधा बिना बीजेपी की इजाजत के नहीं हो रहा होगा क्योंकि केंद्र में दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार के बाद भी अगर गाय को काटना और गंगा में नाले के पानी को रोकने का विधेयक पास नहीं हुआ और कानून नहीं बना है यह बीजेपी की सहमति ही दर्शाता है।इस पर फैसला जनता को करना ही होगा क्यूंकि अंधा बना रहना आँखों के रहते गड्डों में गिरते ही रहोगे लेकिन कितनी बार!!

UP राज्य के कई बड़े शहरों में गाय को काटा भी जाता है और खाया भी जाता है इस पुरे धंधे में नेताओं का बड़ा हाथ है इसलिए नहीं कि इस धंधे में पैसा मिलता हैबल्कि इसलिए क्यों धंधा और राजनीती दोनों ही मस्त चल रहें है..!!बीजेपी के बड़े नेता इस मांस के धंधे में सीधे जुड़े हुए है।

बीजेपी के सुर सुरसा जैसे
ज़ब गाय के गुणगान अधिक हो गए और जनता का भ्रम न टूट जाये तो बीजेपी ने आजकल नमाज को अपना हथियार बना लिया है क्योंकि बीजेपी के नेताओं का कहना है कि सड़क पर नमाज क्यों पढ़ी जाएगी…. बात भी सही है लेकिन फिर यह भी बताना होगा कि संविधान का क्या किया जाये जिसमे सभी धर्मों को इस देश को जैसे चाहो गन्दा करने का अधिकार दिया है. बैसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2015 में साफ कह दिया था कि अनुच्छेद 25 के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति या समुदाय को आजादी के नाम पर सड़क पर अतिक्रमण करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है फिर कुम्भ पर पुरे महीने अतिक्रमण रहा उसे कैसे समझा जायेगा या कोई मान सकता है! क्योंकि वो भी धर्म ही था या भीड़ थी…. व्याख्या होनी चाहिए

भीड़ क्यों रोकी गई थी फिर!!

देश का 30 करोड़ मुस्लिम जो देश आजाद होने पर महज 3,50 करोड़ था,उसे अब क्या करेंगे… क्योंकि 1947 में देश की धरती तो बाँट दी गई थी और फिर से बांटने या हिस्सा देने की सी ही बारी आ चुकी है।

नमाज के लिए सड़क मांगना शायद देश माँगना ही हो लेकिन यह एक प्रयोग हो सकता है क्योंकि आजादी के महज दस दिन पूर्व ही जिन्ना के जिन्न ने ऐसा ही किया था कि देश का प्रधानमंत्री मुझे बनना है क्योंकि जिन्ना बखूबी जानते थे कि मुझे प्रधानमंत्री नहीं बनाया जायेगा इसलिए उन्होंने पहले से ही एक रोडमेप बना रखा था. जिसकी परिणीति में पाकिस्तान छुपा हुआ था। आज से 70 साल से वही तो प्रयास हो रहा है क्योंकि इस देश को कभी भी और कैसे भी भीड़ ने तोड़ दिया या क्षतिग्रस्त कर दिया है। इसलिए नहीं कि हिंदुस्तान का आदमी कमजोर है. बल्कि हिंदुस्तान का आदमी लालची बहुत है सत्ता के लिए खुद को गिरवी रख देता है या मुगलो से रिस्तेदारी जैसा कोई प्रपंच रच देगा या फिर हिंदुस्तान से गद्दारी करके छोटे से टुकड़े पर राजा बनने के लिए हिंदुस्तान को कब्र में सुला देगा.

Up के मायने. इस कदर बदले ?

2017 की सत्ता ने उत्तर प्रदेश की सत्ता में एक नई विचारधारा के सत्ताशीन को जन्म दिया है लेकिन यह भी गलत कहना होगा क्योंकि माफियाओ के लिए इससे पूर्व स्व.कल्याण सिंह व बसपा प्रमुख मायावती का शासन याद किया जा सकता है. मुख्यमंत्री स्व कल्याण सिंह द्वारा STF गठन करके राज्य में कई हजार एनकाउंटर करके माफियाओ के लिए उत्तर प्रदेश की धरती क़ब्रगाह बना दी थी।

स्व लिए.कल्याण सिंह के शासन और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के शासन में बहुत बड़ा अंतर है. स्व कल्याण सिंह ने कभी जातिवाद नहीं किया था. स्व कल्याण सिंह ने अपने शासन काल में कई लोधी समाज के माफियाओ और डकैतो को मौत के मुँह में शमा दिया था या जेल की सलाखों के पीछे रहें थे. लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगते रहते है कि योगी ने ठाकुर समाज के माफियाओ को सदैव सरक्षण दिया है और बचाव करते देखे गए है। उत्तर प्रदेश के बड़े ठाकुर माफियाओ को योगी ने बचाया ही नहीं है सरक्षण में भी रखा है।

जनता के जहन में सरकार बदलनी चाहिए ?

आज के परिपेक्ष में उत्तर प्रदेश की सत्ता से जनता को ठाकुरवाद की बदबू आनी शुरू हो चुकी है. अगर सही समय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बदबू का इलाज नहीं किया तो योगी को गोरखपुर जाने से कोई नहीं रोक सकता है। प्रशासन स्तर पर प्रशासन के बड़े अधिकारी जमकर धन उगाही और जनता को धमकी देना शुरू कर दिए है। पुलिस के आलम इस कदर बढ़ चुके है कि बिना पैसे के माफिया और शरीफ इंसान का पैमाना पुलिस ने जला दिया है।पुलिस तय ही नहीं कर पा रही है कि न्याय कैसे किया जाता है। पुलिस इस समय हताश और बैचेनी में है.

बड़का अफसर जिलों को देखने के बजाय रातें रंगीन करने निकल रहें है ?

सबसे महत्वपूर्ण यह हुआ है कि जिले में बैठे जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी मात्र एक उद्देश्य लेकर जिलों में तैनात है कि कैसे भी हो जिले को शासन के अनुसार न होकर बर्बाद कैसे करना है. इस समय उत्तर प्रदेश के 30% जिलाधिकारियो को छोड़ दिया जाये तो सभी IAS जिले की व्यवस्था को धराशाई करने में लगे है।

उत्तर प्रदेश में एक केडर ऐसा भी है जिसे कम ही ध्यान दिया जाता है जिसमे PCS स्तर के अधिकारी मन मुताबिक काम कर रहें है उन्हें शासन की विचार धारा और जनता से कुछ भी लेना देना नहीं है।

यह होना चाहिए, वरना मुश्किल पड़ जाएगी ?
बीजेपी को बिपक्ष के नेताओं की आय की जाँच न करा कर अधिकारियो की आय की जाँच करानी चाहिए क्योंकि नमाज और प्रार्थना का ज्ञान जमीन पर जो दिया जा रहा है उसके पीछे भ्रष्टाचार को छुपाना भी हो सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जो अफसर हिन्दू मुस्लिम, नमाज, कावड़ का ज्ञान दे रहें है. यही दो चार अफसरों ने बसपा प्रमुख मायावती को जन्मदिन मनाने और बड़े -बड़े गिफ्ट लेने का प्रयोग दिया था.यही अफसर है जिन्होंने सपा मुखिया स्व.मुलायम सिंह यादव को सैफई महोत्सव में नाच कराने का प्रयोग दिया था.

वो अफसर सभी कही बंद देशों में मौज कर रहें है और आज अखिलेश यादव या मायावती उस दुर्गन्ध को झेल रहें है.

सावधानी हटी- दुर्घटना घटी
इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सावधान हो जाइये. क्योंकि सुनामी बहुत धीमी गति से लखनऊ की तरफ बढ़ रही है. ये अफसर आपका साथ छोड़ने वाले है क्योंकि आप बड़े नहीं है. दिल्ली वाले आप से बड़े है।

सिमइया और गुजिया की अनंत शुभकामनायें

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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