स्वास्थ्य विभाग के मुखिया के भ्रष्टाचार पर विश्लेषणात्मक Exclusive रिपोर्ट*
*एटा के स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ के भ्रष्टाचार की परतें*

एटा। पिछले ढाई साल के अंदर स्वास्थ विभाग में भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड ध्वस्त हो गए है। अनेक तथ्य परक शिकायते और दस्तावेजी सबूत जांच अधिकारियों को देने के बावजूद विभागीय भ्रष्टाचार की जांचे कछुआ गति से चल रही है। पर्दे के पीछे गिव एंड टेक की प्रेक्टिल थ्योरी से आरोपियों की मदद की जा रही हैं।इधर नित नए तथ्य उजागर हुए हैं जिसके तहत कहा जा रहा है सी एम ओ एटा सरकारी पद पर रहते हुए अपने परिवारजनों की व्यवसायिक कंपनियों फर्मों के पोषण में लगे है। आगरा सिकंदरा स्थित इनके बेटे की कंपनी के लिए काम करने बाली लगभग दस फर्में है जिनको एटा के स्टेट बजट एवं एन एच एम बजट से विविध तरह की खरीद कराई गई है इस खरीद के भुगतान का लाभ अंततः बेटे की कंपनी को हुआ है क्योंकि सारी सामग्री इसी कंपनी से मुखौटा फर्मों ने की है। स्वास्थ विभाग में सी एम ओ डा उमेश कुमार त्रिपाठी के भ्रष्टाचार के हथकंडो से वाफिक सुविज्ञ सूत्रों ने यहां तक बताया है कि आगरा में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहते हुए इन्होंने अनेक आदेश अपनी कंपनी एवम फर्मों के नाम किए थे और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी कराए। बताया जा रहा है कि सरकारी बजट का अपने हित में बंदरबांट करने के लिए उक्त अफसर अपना निजी रेकिट फर्मों और कंपनियों का लेकर आए और उनको पनपने में लगे रहे। मजे की बात तो यह है कि विभागीय आयोजनों में जो प्रशिक्षण कार्यशालाएं आदि होती हैं इनमे भोजन जलपान आदि भी आगरा की फर्में आपूर्ति करती है। जबकि एटा में अनेक नामी गिरामी संस्थान क्रियाशील है फिर भोजन आदि आगरा से लाने की क्या तुक है.? यह सवाल खुद ब खुद सी एम ओ के आगरा प्रेम के पीछे छुपे रहस्य को बेनकाब स्वत ही कर देता है। विभाग में पिछले ढाई वर्ष को अंदर उक्त सी एम ओ ने अनेक आदेश प्रशासनिक स्तर पर ऐसे प्रचलित कर दिए हैं जो न तो शासनादेश के मुताबिक है और न किसी प्रशासनिक निर्देश के तहत हैं अनेक राजपत्रित अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर कर्मचारियों को अपनी पपेट बना कर उलजलूल दबाव देकर काम कराया जा रहा है। यदि पिछले ढाई वर्ष के विभागीय कामकाज की सघन पड़ताल की जाए तो स्वास्थ विभाग में भ्रष्टाचार बहुरूपिया अवतरण में सरकारी धन का अपहरण करता जगह जगह पर मिलेगा। चाहे वह बजट की व्यवस्था में या प्रशासनिक कथित तेजी तुर्शी के नाम पर किए गए कामकाज।
एटा के स्वास्थ विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर अनेक प्रबुद्ध संगठनों ने जानकारों की संयुक्त टीम बना कर कार्यवाही के लिए केंद प्रदेश सरकार के उच्च पटल पर ले जाने की तैयारी कर ली है। अब देखना है शासन प्रशासन स्वास्थ विभाग के बहुरूपिया भ्रष्टाचार को महज देखता है या कार्यवाही भी करता है यह निकट भविष्य में देखने बाली बात होगी ?