एटा में एक-डाक्टर के कागजों पर खुले हैं चार चार अस्पताल

सीएमओ की निरंकुश कार्य शैली से प्रतिदिन टूट रहा है गरीबों पर कहर

सी एम ओ की गोद मे बैठ कर एक
वड़े अखवार का रिपोर्टर चलवा रहा हे कई अवैध अल्ट्रासाउंड

एटा में एक-डाक्टर के कागजों पर खुले हैं चार चार अस्पताल

अप्रशिक्षित झोलाछाप इलाज के नाम पर मरीजों को बांट रहे हैं नोट लेकर मौत

चंद दिनों में स्वास्थ्य विभाग के कई दलाल लाखों रूपया लेकर खुलवा देते हैं सील हुए नर्सिंग होम

झोलाछापों के नर्सिंग होम्स लगभग 6 दर्जन से अधिक बुखार, खुजली के मरीजों और प्रसूताओं को दे चुके हैं आसान मौत

कई चापलूस पत्रकार उपकृत तो कई सच्चाई लिखने वाले अखबारों के बिल गायब
एटा समाचार
एटा। जनपद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की झोलाछापों द्वारा संचालित नर्सिंग होमों पर दया की दृष्टि गरीबों पर कहर बनकर टूट रही है। अब तक इन नर्सिंग होमों ने लगभग 6 दर्जन से अधिक स्त्री, पुरुष और बच्चों की जिंदगियां निगल ली हैं। पूर्व जिलाधिकारी अंकित अग्रवाल की सीएमओ पर विशेष कृपा रही जिसके चलते जनपद में दलालों के माध्यम से मौत का कारोबार करके सीएमओ साहब ने जहां अपनी तिजोरियां भर ली हैं वहीं स्वास्थ्य विभाग के दलालों भी की पौ बारह हुई है। सीएमओ की सम्पत्ति की जांच कराई जाए तो चौंकाने वाले परिणाम आयेंगे वहीं कुछ न करने वाले दलालों की सम्पत्ति की जांच कराई जाए तो उन गरीबों का पैसा जिनकी मां, बहन, पति पत्नी को इलाज के नाम पर लूटकर उन्हें मौत के घाट उतारने वाले झोलाछापों को कार्रवाई से बचाने के लिए वसूला गया वह पैसा दलालों की तिजोरियों से निकलेगा। कोई धंधा न उद्योग कैसे करोड़ों के मालिक बन गये। कई पत्रकारों को मेडिकल स्टोर और अल्ट्रासाउंड सेंटर खुलवा दिये हैं जहां अल्ट्रासाउंड प्रशिक्षित व्यक्ति नहीं बल्कि उन्हें अशिक्षित कहा जाए तो ज्यादा बेहतर है क्योंकि उनके द्वारा मरीजों को जो रिपोर्टें दी जा रही हैं वह बीमारी उनके आसपास भी नहीं होती है कई मरीजों ने दो दो अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड कराकर मिली रिपोर्टों का खुलासा पत्रकारों से किया है और इन अल्ट्रासाउंड सेंटरों की दुकानें जिन डाक्टरों के नाम से पंजीकरण कर खोली गई हैं वे डाक्टर इन दुकानों पर कभी बैठते ही नहीं हैं। चर्चा इस प्रकार की भी हैं कि इन अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भ्रूण जांच कराने के लिए दूर-दूर से लोग गर्भवती महिलाओं को लेकर आते हैं जिनसे दस से पन्द्रह हजार रूपया प्रति भ्रूण जांच के लिए जाते हैं। सब कुछ निर्भयता से चल रहा है क्योंकि सीएमओ साहब मेहरबान हैं।

सीएमओ ने मनमानी और तानाशाही से उन अखबारों को आर्थिक क्षति पहुंचाई है जो खबरों से समझौता नहीं कर सके और सच को उजागर करते रहे उन अखबारों को स्थानीय होते हुए भी विज्ञापन देना बंद करा दिया जबकि यह शासनादेश है कि मंडल स्तरीय अखबार के साथ साथ स्थानीय जनपद से निकलने वाले डीएवीपी की विज्ञापन मान्यता प्राप्त समस्त अखबारों को क्रमशः विज्ञापन दिए जाएं लेकिन सीएमओ सिर्फ एक दो स्थानीय अखबार को विज्ञापन देकर और कई स्थानीय अखबारों को विज्ञापन न देकर नियम विरूद्ध कार्य कर रहे हैं।
कुछ पत्रकारों पर तो वह इतने मेहरबान हैं कि वह उनको ही नौकरी दिए बैठे हैं। इतना ही नहीं राष्ट्रीय कोहिनूर समाचारपत्र के बिलों का भुगतान भी नहीं कर रहे हैं क्योंकि हर खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर हम अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन करते रहे लेकिन दलालों ने मरीजों के मरने पर भी साहब की प्रशंसा में कोई कसर नहीं छोड़ी है। एक साहब ने अखबार को ढाल बनाकर जिले के सभी संसाधनों पर कब्जा कर लिया है।
जिलाधिकारी के तेवरों को देख कर तो ऐसा लगता है कि जनपद की जनता को ऐसा अधिकारी मिला है जिसमें पीड़ित और गरीबों के प्रति करुणा और दया का भाव है तो वहीं अनियमित और शासन की नीति के अनुसार कार्य न करने वालों पर जिलाधिकारी की वक्रदृष्टि जरूर रहेगी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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