दिव्य प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार ने तुलसी एकल मंचन को लेकर की पपत्रकार वार्ता

सेवा, साधना, सम्बोधि के भाव से अनुप्राणित कुष्ठ पीड़ितों की चिकित्सा एवं उनके बालक बालिकाओं हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन और संस्कार की भावना के साथ 12 जनवरी 1997 को हरिदवार के चण्डीघाट से डा आशीष भैया जी दद्वारा प्रारम्भ किया गया “दिव्य प्रेम सेवा मिशन न्यास” एक आध्यात्म प्रेरित स्वैच्छिकसेवा संगठन है
सैकड़ों वर्षों से उपेक्षित, शोषित, दबे एवं ठुकराये हुए किन्तु अपने ही समाज के अभिन्न अंग कुष्ठ पीड़ित बधुओं के दुख दर्द के प्रति उत्तरदायी है। अपने समाज की आर्थिक विषमता, सामाजिक वहिष्कार जिसके कारण इनको तिरस्कृत जीवन जीने के लिए विवश होना पड़ता है। विषमता मुक्त समाज की पुनर्रचना की आवश्यकता को ध्यान में रख कर “दिव्य प्रेम सेवा मिशन न्यास द्वारा प्रारंभ की गई सेवा यात्रा आज 26 वर्षों में अनेक सहयात्रियों की संवेदना सहानुभूति सहृदयता और सहयोग से विशाल वृक्ष का स्वरूप ग्रहण कर चुकी है।
“दिव्य प्रेम सेवा मिशन न्यास द्वारा संचालित सेवा के विभिन्न प्रकल्प चिकित्सालय, विद्यालय, छात्रावास पर्यावरण संरक्षण- हरितिमा संवर्धन, गंगा स्वच्छता, ग्रामीण क्षेत्र में गंदगी, खुले में शीघ्र की समस्या के निवारण जैसे अनेक सेवा कार्यों का संचालन एवं समाज को प्रेरणा देने का कार्य नवयुवकों के माध्यम से सेवाकुंज परिसर, बडीघाट, हरिद्वार एवं वंदेमातरम कुंज परिसर, संचालित हो रहे हैं।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा संचालित सेवा कार्यों में समिधा सेवार्थ चिकित्सालय, संजीव गुलाटी स्मृति चिकित्सालय एवं योग अनुसंधान केन्द्र, अनवरत अन्न सेवा, माधवराव देवले शिक्षा मंदिर, हरित भारत एवं निर्मल गंगा स्वच्छ भारत अभियान, प्रदीप वाटिका खाजावास, गंगा वाटिका बालिका छात्रावास, दिव्य भारत शिक्षा मंदिर जूनियर हाईस्कूल आत्म संवाद अन्तर्यारा शिवीय, दिव्येश्वर ध्यानलिंगम् मंदिर प्रमुख है। आगामी 4 जून को होने वाला पद्मश्री शेखर सेन कृत महानाट्य ‘तुलसीदास “दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सेवा प्रकल्पों को समर्पित गोस्वामी तुलसीदास जी का काशी से अटूट संबंध है। वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भारत वर्ष में इस महानाट्य का संचन प्रासंगिक एवम अत्यन्त आवश्यक है।
इस महानाट्य में गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवनकाल का बहुत ही सजीव चित्रण किया गया है। यह मंचन काशी में पहली बार हो रहा है। इस महानाट्य मंचन से काशी अंचल के वासियों में आध्यात्मिक, साँस्कृतिक, एवम सामाजिक नवचेतना का संचार होगा। तथा दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सेवा कार्यो में काशी अचल के वासियों की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित हो सकेगी। दिव्या प्रेम सेवा मिशन काशी के संयोजक डा नन्दलाल जी, राहुल सिंह जी, श्री प्रकाश जी, मनोज पौदार जी, राजकुमार सिंह जी, संजय कुमार सिंह जी. हा महेश मिश्र, अभिषेक मिश्र, इन्द्रपाल सिंह जी, सत्यनारायण जी, डा संजय राठौर जी, डा संजीव सिंह जी, अभिषेक सिंह जी, विशाल सिंह जी, नरेंद्र सिंह, सुनील सिंह जी, शैलेश मिश्रा सहित सैकड़ो समर्पित सहयात्री है अनवरत मिशन को निस्वार्थ अपनी सेवायें दे रहे हैं।