
गांव के लोग दावा कर रहे है कि कोई फॉगिंग नहीं कराई गई
एटा, कार्यालय संवाददाता। जनपद 569 ग्राम पंचायतों को मच्छर भगाने और फागिंग करने के लिए दस हजार रुपये दिया गया है। यह पैसा 60 लाख से अधिक होता है। इतना पैसा खर्च होने के बाद मच्छरों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। गांव से लेकर शहरों तक मच्छरों से लोग परेशान है। गांव के लोग दावा कर रहे है कि कोई फॉगिंग नहीं कराई गई।
संचारी रोगों की रोकथाम को एक अप्रैल से संचारी रोग नियंत्रण-दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम स्वच्छता समिति के पास फॉगिंग कराने को बीस-बीस हजार रुपये का बजट होता है। ग्राम प्रधान और आशा संयुक्त रूप इस पैसे का प्रयोग कर सकते हैं। गांव में फॉगिंग के लिए डीजल, पेट्रोल समिति से दिया जाएगा। उसके अलावा दवा और मशीन मलेरिया विभाग देगा। एक लीटर दवा से फॉगिंग के लिए 19 लीटर डीजल और चार लीटर पेट्रोल की आवश्यकता होती है, जिसे ग्राम प्रधान और आशा को गांव में पहुंचने वाली टीम को देकर फॉगिंग कार्य कराया जाना है।
वर्ष 2022 में डेढ़ लाख रुपये से 300 गांव में हुई फॉगिंग एटा। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2022 में 250 से 300 गांव में फॉगिंग कार्य कराया गया था, जिसके लिए मलेरिया विभाग ने दवा और मशीनों पर डेढ़ लाख रुपये का बजट व्यय किया था। इसके अलावा संबंधित ग्राम पंचायत से फॉगिंग को डीजल, पेट्रोल पर बजट का व्यय हुा था।
प्रत्येक गांव में फागिंग कराने के आदेश दिए गए हैं। प्रधान को अलग से कोई पैसा नहीं दिया जाता है। राज्य वित्त की किश्त में से यह पैसा खर्च होता है, जो गांव आपने देखे हो वहां पर हो सकता है फांगिंग ना की गई हो।
केके चौहान, डीपीआरओ
हर गांव में हम पांच-पांच हजार रूपये की किश्त दो बार में देते हैं। सभी प्रधानों को निर्देश भी देते है कि वह फागिंग कराते रहे। अगर पैसा खर्च नहीं होता है तो आगे की किश्त नहीं जाती हैं।
डॉ. उमेश त्रिपाठी, सीएमओ एटा