पत्रकारों व मीडिया कर्मियों के हित में कानून बनाये देश व प्रदेश सरकार-कुल भूषण शुक्ल राष्ट्रीय अध्यक्ष एमडब्ल्यूए
जौनपुर में पत्रकार देवेन्द्र खरे पर हुए गोलीकांड व प्रतापगढ़ के मांधाता में दरोगा द्वारा पत्रकार के साथ अभद्रता पर जताया रोष

लखनऊ। मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.) भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुल भूषण शुक्ल ने कहा है कि पत्रकारिता देश के चार मुख्य स्तम्भों में से सबसे मुख्य स्तम्भ माना जाता है। परन्तु देश की आजादी से लेकर आज तक न जाने कितनी सरकारें आयीं और चली गयीं परन्तु आज तक किसी भी सरकार के कार्यकाल में किसी भी विधान सभा/बिधान परिषद अथवा देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था संसद लोक सभा/राज्यसभा में देश के चौथे स्तम्भ मीडिया/प्रेस अथवा पत्रकारिता के हित में न तो कोई चर्चा ही की गयी और न ही कोई बिल ही प्रस्तुत किया गया है। जहां एक तरफ सरकारों द्वारा देश के तीनों स्तम्भ न्यायपालिका,कार्यपालिका,व व्यवस्थापिका से जुड़े व्यक्तियों को पुर्ण सुरक्षा के साथ – साथ अन्य समस्त लाभकारी सुविधाएं प्रदान की जा रहीं हैं वहीं दूसरी और देश के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता की पूरी तरह से उपेक्षा की जा रही है।
जबकि एक पत्रकार एसी में बैठ कर नहीं भयंकर सर्दी,गर्मी,बरसात,में भाग दौड़ करके देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाहन कर रहा है।इतना ही नहीं साथ ही पत्रकारों का खुला उत्पीड़न भी किया जा रहा है। माफियाओं द्वारा पत्रकार को धमकियां दिया जाना आम बात हो गयी है। सरकार के किसी भी कर्मचारी के विरूद्ध शिकायत मिलने पर केवल जांच के नाम कर मामले को लम्बें समय तक लटकाया जाता है तथा पत्रकार के विरुद्ध प्रार्थना पत्र प्राप्त होते ही सीधे एफ आइ आर दर्ज कर जेल भेजा जाता है।
आखिर भारत का संविधान क्या कहता है ? पहले जांच या गिरफ्तारी ! यदि जांच तो पत्रकार की सीधे गिरफ्तारी क्यों ? यदि गिरफ्तारी तो सरकारी अधिकारी/कर्मचारी की गिरफ्तारी क्यों नहीं ?
आखिर एक देश में दो अलग-अलग नियम क्यों ? पत्रकारों की ऐसी ही अनेक समस्याओं के सम्बन्ध में मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.) भारत के द्वारा पत्रकारों के सम्बंध में कानून बनाये जाने की मांग को लेकर एक मुहिम चलाई जा रही है।हमारी सरकार से मांग है कि जिन पत्रकारों के संबन्ध में जिला सूचना अधिकारी,जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के नाम पत्र जारी हों ऐसे पत्रकारों को सरकारी मान्यता प्रदान की जाये,पत्रकार के विरुद्ध शिकायत मिलने पर सर्वप्रथम सरकारी अधिकारी की तरह जांच की जाये,मान्यता प्राप्त पत्रकार को 30000/-रुपये प्रतिमाह भत्ता दिया जाये,सरकारी तर्ज पर पत्रकार व उसके परिजनों को स्वास्थ्य लाभ दिया जाये, कवरेज करते समय मृत्यु होने पर अथवा हत्या होने पर पत्रकार के आश्रितों को एक करोड़ रूपये आर्थिक सहायता प्रदान की जाये ।
सट्टेबाज, भूमाफियाओं, खनन माफियाओं, शराब माफियाओं के समाचारों का तत्काल संज्ञान लेकर कार्यवाही की जाये तथा संज्ञान न लेने वाले अधिकारी के विरूद्ध संरक्षण देने के तहत कार्यवाही की जाये,पत्रकार को धमकी दिया जाना संज्ञेय अपराध माना जाये, प्रत्येक जनपद में मीडिया हाउस का निर्माण कराया जाये, प्रत्येक जनपद में प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकारों के मध्य प्रत्येक माह बैठक का आयोजन किया जाये। अंत में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शुक्ल ने देश व प्रदेश के समस्त जनपदों ,नगरों ,तहसील स्तर के पत्रकारों व मीडिया के सहयोगी समाजसेवियों से अधिक से अधिक पत्रकार /मीडिया के हित में मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.) भारत से जुड़ने की अपील करते हुए कहा की मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.) भारत प्रत्येक पत्रकार/समाजसेवी का संगठन है।संगठन की यह मुहिम प्रत्येक पत्रकार/मीडिया कर्मी/समाजसेवी के हित में है। जो सड़क से लेकर संसद तक चलायी जायेगी । उन्होंने जौनपुर में पत्रकार देवेन्द्र खरे पर हुए गोलीकांड एवं प्रतापगढ़ के मांधाता में दरोगा द्वारा पत्रकार के साथ के साथ की गयी अभद्रता पर गहरा रोष भी ब्यक्त किया।