संस्थागत प्रसव के प्रति महिलाएं हो रही जागरूक
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में संस्थागत प्रसव की महत्वपूर्ण भूमिका

एटा,
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिसका अब असर भी देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 5 के अनुसार जिले में संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओं में बढ़ोतरी हुई है। संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता के कारण संस्थागत प्रसव दर में 15 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 की रिपोर्ट के अनुसार संस्थागत प्रसव दर 61.7 प्रतिशत थी जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 की रिपोर्ट में बढ़कर 76.7 प्रतिशत हो गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी बताते है कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए संस्थागत प्रसव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। जिले में पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक सुरक्षित प्रसव के लिए सुविधा उपलब्ध है। प्रशिक्षित और सक्षम स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था के साथ शिशु सुरक्षा के लिए भी सारी सुविधाएं तुरंत मिल सके इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए संस्थागत प्रसव काफी महत्वपूर्ण है।
नोडल अधिकारी आरसीएच एसीएमओ डॉ सुधीर कुमार मोहन बताते हैं कि जिले में काफी संख्या में परिवार संस्थागत प्रसव को चुन रहे हैं। वर्ष 2020 अप्रैल से वर्ष 2021 मार्च तक सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों में 19629 व निजी स्वास्थ्य इकाइयों में 12368 महिलाओं ने संस्थागत प्रसव को चुना। वर्ष 2021 अप्रैल से वर्ष 2022 मार्च तक सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों में 18919 व निजी स्वास्थ्य इकाइयों में 17286 संस्थागत प्रसव किए गए। व वर्ष 2022 अप्रैल से जनवरी 2023 तक सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों में 16735 व निजी स्वास्थ्य इकाइयों में 13718 संस्थागत प्रसव किए गए हैं। अपेक्षित है कि मार्च माह के अंत तक यह आंकड़ा और भी अधिक बढ़ जाएगा।
उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए एएनएम और आशा कार्यकर्ता, गर्भवती और उसके परिवार को प्रेरित करने व गर्भ के दौरान कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करने के लिए जागरूक करती हैं। साथ ही संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए पहली बार गर्भवती होने वाली महिला द्वारा संस्थागत प्रसव कराने पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत उसे 5000 रुपए देने का प्रावधान है। इसके साथ ही जननी सुरक्षा योजना के तहत किसी भी सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने से प्रसूति को आर्थिक सहायता भी दी जाती है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसूति को 1400 रुपये एवं शहरी इलाकों में 1000 रुपये की मदद दी जाती है।
नोडल अधिकारी ने बताया संस्थागत प्रसव से मां और होने वाले बच्चे को कई फायदे होते हैं। संस्थागत प्रसव से जच्चा बच्चा की बेहतर देखभाल संभव है। प्रसव से जुड़ी तमाम जटिलताओं से निपटने के लिए पर्याप्त सुविधाएं व सक्षम स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी मातृ-शिशु मृत्यु दर को काफी हद तक कम करता है। उन्होंने बताया संस्थागत प्रसव के दौरान नवजात शिशु की देखभाल के लिए तत्काल चिकित्सा सुविधा मौजूद रहती है साथ ही बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध भी मिल जाता है। इसके साथ ही संस्थागत प्रसव होने पर बच्चे का टीकाकरण समय पर हो जाता है जबकि घर में पैदा हुए बच्चों का कई बार जानकारी के अभाव में समय पर टीकाकरण नहीं हो पाता है।