रामचरित मानस पर टिप्पणी पर स्वामी प्रसाद ने दी सफाई, बोले, संशोधित हो महिलाओं व दलितों के अपमान वाली चौपाई ।।

वाराणसी। पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधान परिषद सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्या ने रामचरित मानस पर की गई अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि दलितों, महिलाओं के अपमान वाले अंश पर मैने सवाल खड़े किए। उस पर आज भी टिका हूं। इसे संशोधित किया जाए। कहा कि रामचरित मानस की प्रतियां जलाने की बात सरासर गलत है। सरकार के दबाव में यह पुलिस का एजेंडा है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म पैगंबर से पहले का है। इतिहास में इस बात के प्रमाण मिलते हैं। मोहम्मद साहब ने इसे पहचान दी। ऐतिहासिक प्रमाण बौद्ध धर्म से शुरू होता है। इसके बाद एक-एक कर सारे धर्म आते हैं। भगवान बुद्ध से पहले का कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है। सनातन धर्म की प्राचीनता ऐतिहासिक खोज का मुद्दा है। कहा कि अपने धर्मों की अच्छाइयों की तारीफ सभी कर सकते हैं। कमियों पर सवाल खड़े किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैनें रामचरित मानस नहीं उसकी कुछ चौपाइयों के अंश का विरोध किया। इसकी प्रतियां हिंदुओं ने ही जलाई। दलितों, आदिवासियों व महिलाओं ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि मेरे सारे सर्टिफिकेट में हिंदू लिखा है। उन्हें विक्षिप्त कहने वालों पर बोले, लोग डाक्टर कब से बन गए और मेडिकल सर्टिफिकेट देने लगे। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। कहा कि सारे एयरपोर्ट, बंदरगाह, एलआईसी आदि निजी हाथों में सौंप दिया गया। अब बचा ही क्या है? ईस्ट इंडिया कंपनी लूट रही थी, उसी तरह भाजपा सरकार जनता की गाढ़ी कमाई अपने चहेते उद्योगपतियों अडानी व अंबानी को बेच रही है।