
चापलूसऔर चाटुकार कर रहे जिले के अधिकारियों के कैरियर से खिलवाड़।
कर्तव्यों को ताक पर रख चापलूसों और अधिकारियों का महा गठजोड़।
हो रही फजीहत
कुमार विश्वास ने मंच पर धोया तो आम जानता भी इन्हे परख कर हंंस रही है।
एटा – यूं तो “राजाओ के कान का कच्चा” अथवा चापलूसों से घिरे होने के आपने बहुत किस्से और कहानी को सुना और देखा होगा।तथा परिणाम भी परखा होगा।अब बात करते है।जनपद एटा की। यहाँ चापलूस और चाटुकार जिले के अधिकारियों के कैरियर से खिलवाड़ कर रहे हैं। दौनों यानी चापलूसों और अधिकारियों का महागठजोड फजीहत को तो जन्म दे ही रहा है। साथ ही शेयर बाजार की तरह इनकी गरिमाओं का सूचकांक कितना गिर रहा है। इन्हें यह भी नहीं पता चल रहा है। वैसे तो मेरे पास अधिकारियों के कार्यकाल में सैकड़ों से ज्यादा कारनामे है।जहां इनके गिरे सूचकांक को ये पुनः उठायें तो भी भरपाई नही कर पायेगें। मगर झूठी वाहवाई से बहुत खुश हैं।सभी बातो पर ध्यान वक्त आने पर दिया जाए तो उचित रहेगा। अभी ताजा मामला जिला उद्योग एवं विकास प्रदर्शनी में लगे दो विशेष कार्यक्रमों का ही काफी है।पहला कार्यक्रम “कन्हैया मित्तल” गायक और दूसरा “कुमार विश्वास” का कवि सम्मेलन है।कन्हैया मित्तल के कार्यक्रम में ऐसी व्यवस्था कि भीड़ ने कुर्सियों को तोड़ दिया। और अधिकारियों के सोफों पर अतिक्रमण कर लिया तो दूसरे कार्यक्रम मे कवि के सामने की कुर्सियां ही खाली पड़ी रही।कवि देखकर निराश हुआ। आखिर यह सब भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इन दोनों पटकथाकारों को क्या कुमार विश्वास ने नहीं चेताया था? मगर यहां तो चापलूस और और अधिकारी एक दूसरे के पूरक हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इन दौनों में अपनी-अपनी कमजोरियां हैं।कमजोरी व्यक्ति के व्यक्तित्व को गरत की ओर ले जाने का कार्य करती है।मेरे जीवन की पत्रकारिता के समय मे आज तक की सभी नुमाइशो मे वर्तमान नुमाइश की व्यवस्था सबसे ज्यादा गिरे स्तर पर है।और ढिढोंरा इतना पिट रहा है।कि इससे अच्छा कभी कुछ हुआ ही नहीं था।पिछली नुमाइशो का फीड बैक लेने की आवश्यकता इनके लिये कोई मायने नही रखती है।आप जो कुछ भी कर रहै है।जानता सब समझ रही है।इस महागठजोड ने बहुत सारी परीक्षायें दी होंगी।प्राप्तांक भी आशाओं से ज्यादा लाये होगें।मगर यह एटा की जनता है।कितनी भी उत्तर पुस्तिकाऐं भरिये मार्किंग जनता के हिसाब से होती है।
पत्रकार जसवन्त सिंह यादव ( स्वतंत्र भारत)