एटा
बेज्जती कैसे करते हैं कुमार विश्वास से सीखे।

कल यानि 22 जनवरी को शाम 7 बजे से कवि सम्मलेन का सुभारम्भ होता है, मेला परिसर मे प्रवेश करते ही लगने लगा कोई कवि नहीं बल्कि कोई #ब्रांड आ रहा है दर्शकों को तीन कैटेगरी में बांट दिया गया —
1- वी.वी.आई.पी,पास -ये वो लोग थे जो आगे की पंक्तियों मे बैठने थे वंहा उनके बैठने की व्यवस्था भी ब्लॉक बाइज थीं, यंहा भी सोफे ओर कुर्सियां थीं,सोफे चुनिंदा लोगों के लिए ही थे, अधिकांश वी वी आई पी के लिए सिर्फ कुर्सियां ही थीं।
सर्दी में कॉफी की भी व्यवस्था थीं पर कुछ खास लोगों के लिए ही।
मिडिया कर्मियों को भी कबरेज पर आने के लिए इसी पास की जरूरत पढ़ी।
2- वी.आई.पी. पास ये वो पास थे जो जाली के पीछे थे ओर वंहा उनके बैठने के लिए सिर्फ और सिर्फ कुर्सियां थी जो की मंच से बहुत दूर थे।
3–सधारण लोग इनपर कोई पास नहीं था ये दो जालियों के वाद मंच से बहुत दूर खुले आसमान के नीचे खडे होकर कार्यक्रम देख रहें थे।
एटा प्रशासन यह भूल गया था ये हाई-फाई व्यवस्था हम एक ब्रांड के लिए कर रहे है, ओर बड़े ब्रांड को भीड़ पसंद होती है अब इतनी शक्ति मे भीड़ कैसे होती अधिकांश लोग अपने घरों को वापस चले गए।
जब कवि कुमार विश्वास मंच पर आये तब दोनों दर्शक दीर्घा में अधिकांश कुर्सियां खाली पड़ी थी, वें समझ गए यंहा क्या अभी हुआ है ओर क्या पहले हुआ है।
कोई बढ़ा ब्रांड जब किसी स्थान पर अपना कार्यक्रम करने जाता है ओर उसेवंहा आशा के अनुरूप श्रोता न मिले तो गुस्सा आना लाजिमी है पर कवि अपनी नाराजगी अपने अंदाज मे निकलता है,
वह अपने काव्य मे व्यंग के रूप में पीछे खडे साधारण लोगों ओर अजय चतुर्वेदी को सम्मान देकर,,,,
वाकी पुरे प्रसाशन को जनप्रतिनिधि ओर मेला कमेटी को वेज्जत करके एक बढ़ा सबक सिखा गये।
वो घुमा फिरा के ये बता गए हमने यंहा आने के कितने पैसे लिए ओर किस ने ये रकम चुकाई।
वीडियो क्लिप देखें ओर अंदाज लगाएं वो आपका अपमान करते रहे और आप अपने अपमान पर ठहाके लगाते रहे।