*आरोप भी साबित नहीं कर पाई खाकी, रिपोर्ट योगेश मुदगल
एक मामले में एफआर, दूसरे में विवेचना प्रचलित

एटा। कोतवाली देहात में सिपाहियों पर पिटाई करने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। विवेचना में मामला झूठा पाया गया और इसमें एफआर लगा दी गई है। दूसरी एफआईआर एक सिपाही पर दुष्कर्म करने की दर्ज हुई थी। जिसमें विवेचना प्रचलित है और दस से अधिक पर्चे कट चुके है।
2300 कारतूस मामले में बदलती रही विवेचना
एटा। कोतवाली नगर से 2300 कारतूस गायब हुए थे। इस मामले में हैड मोहर्रर विजय सिंह ने कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर क्राइम को सौंपी गई थी। विवेचना लगातार बदलते रहने के कारण इसमें पता नहीं चल सका। मामले में क्या कार्रवाई हुई।
ग्रामीणों की पिटाई पर कोतवाल पर हुई थी कार्रवाई
एटा। निधौलीकलां क्षेत्र में पुलिस पर ग्रामीणों ने पिटाई का आरोप लगाया था। पुलिस पर ग्रामीणों के पीटने का आरोप लगा था। मामले में एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए थानाप्रभारी, दरोगा को हटाया था। जांच एएसपी को सौंपी गई थी। निधौलीकलां पुलिस कहती है मामले की जांच एएसपी कर रहे है।
एटा, अपराध भी हुआ, खाकी पर इल्जाम भी लगे और मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हुई। पुलिस ने विभागीय मामलों में ढूंढे से सबूत नहीं मिले। अधिकांश मामलों में एफआर लग गई और किसी में पूरी तरह से विवेचना ही शुरू नहीं पाई। एक मामले में सिर्फ पर्चा कटने तक की कार्रवाई तक ही खाकी सीमित रही।
जिले में कई ऐसे मामले हुए हैं जिसमें खाकी पर सवाल उठे और पुलिसकर्मियों पर एफआईआर तक दर्ज हुई। खाकी पर एफआईआर दर्ज हुई उनके खिलाफ खाकी को ही सबूत ढूंढने में काफी परेशानी हो रही है। कोतवाली देहात में पुलिसकर्मियों पर दो मामले दर्ज हुए थे। इसमें एक मामले में एफआर लग चुकी है तो वही दूसरे मामले में विवेचना प्रचलित है। महीनों बाद भी पुलिस किसी भी नतीजे तक नहीं पहुंची। कोतवाली नगर में कारतूस गायब होने के मामले में विवेचना लगातार ट्रान्सफर होने के कारण उसमें भी सही तरह से जांच नहीं हो पाई है। जैथरा में कई साल रायफल चोरी के पुराने मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई उसमें भी विवेचना प्रचलित ही है।