पिता ने रेप कर किया गर्भवती, बेटे को गोद में भी उठाने के लिए तड़प रही मां, प्रशासन मांग रहा सबूत

पिता ने रेप कर किया गर्भवती, बेटे को गोद में भी उठाने के लिए तड़प रही मां, प्रशासन मांग रहा सबूत

नाबालिग खुशबू (बदला हुआ नाम) के साथ पिता ने हैवानियत कर उसे गर्भवती कर दिया। इसके बाद उसके जिगर के टुकड़े को लावारिस छोड़ दिया। बेटा अब वाराणसी के अनाथालय में पल रहा है। उसकी मां भी लाचार है।
प्रयागराज में दीप पर्व पर हर जगह खुशियों के दीप जलाए जा रहे हैं तो एक बदनसीब मां का दिल जल रहा था। अब बेटे के जन्मदिन पर वह कलेजे के टुकड़े को गले लगाने को तड़प रही है। उसके आंसू थम नहीं रहे हैं। बात उस बदनसीब लड़की की हो रही जो अपने सौतेले पिता की दरिंदगी का शिकार हुई। 
नाबालिग खुशबू (बदला हुआ नाम) के साथ पिता ने हैवानियत कर उसे गर्भवती कर दिया। इसके बाद उसके जिगर के टुकड़े को लावारिस छोड़ दिया। बेटा अब वाराणसी के अनाथालय में पल रहा है। बेबस मां अफसरों की चौखट के चक्कर काट थक गई। अपने ही बेटे को अपना बनाने के लिए उससे सबूत मांगा जा रहा है। वाराणसी प्रशासन और अनाथालय वालों का कहना है कि कागज पर साबित करो कि बेटा तुम्हारा है। मां मजबूर, लाचार है। 
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सामाजिक कार्यकर्ता उसका सहारा बने हैं लेकिन प्रशासन का दिल नहीं पसीज रहा। बेटे का जन्म प्रयागराज के जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) में हुआ था लेकिन अस्पताल के सारे रिकार्ड खंगालने पर प्रमाण नहीं मिल रहा। बच्चे के जन्म से जुड़े दस्तावेज, रजिस्टर ‘जादू’ के जोर से गायब हैं। अस्पताल प्रशासन और जिले के अधिकारी रिकॉर्ड न दर्ज होने की दुहाई दे रहे हैं। जबकि उसी अस्पताल की एक नर्स गवाह है कि खुशबू ने बच्चे को जन्म दिया था। बदनसीब मां ने आला अफसरों से गुहार लगाई गई है। 
नाबालिग मां की दर्द भरी दास्तान
शिवकुटी थानाक्षेत्र के चांदपुर सलोरी की रहने वाली खुशबू सत्रह साल की उम्र में ही मां बन गई। असल में बालिका का सौतेला पिता ही उससे दुष्कर्म करता था। जब वह गर्भवती हुई तो पिता उसे डफरिन अस्पताल ले गया। वहां खुशबू ने बच्चे को जन्म दिया। शातिर पिता बच्चे को लावारिस छोड़ आया। अंत में बच्चा वाराणसी के अनाथालय पहुंच गया। सामाजिक कार्यकर्ता शारा व अमर आनंद ने मां और मासूम को मिलाने का बीड़ा उठाया। लंबी लड़ाई के बाद दुष्कर्मी पिता को वाराणसी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा। अब मां अपने ही जिगर के टुकड़े को पाने के लिए सबूतों की तलाश में दर दर भटक रही है। बच्चे का जन्म 28 अक्तूबर 2014 को हुआ था। अब वह आठ साल का हो गया और मां के आंचल के बगैर अनाथों की जिंदगी गुजार रहा है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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