मुकदमे की सुनवाई ना होने से आम नागरिक परेशान

प्रयागराज /मेजा तहसील पर कुछ प्रतिशत वकीलों के चलते तहसील प्रणाली पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं/दरअसल मामला यह है कि,प्रयागराज के अधिकांश तहसीलों पर कुछ प्रतिशत वकील नहीं चाहते हैं कि तहसील पर कोर्ट चले,और जनता को न्याय मिले जिस वकीलों पर भरोसा करके लोग अपना मुकदमा का फैसला सुनना चाहता है वही वकील रोज नए प्रस्ताव के साथ कोर्ट नहीं चलने का आदेश पारित कर तहसीलदार /एसडीएम के सामने पहुंच जाते हैं और ऐसे वकीलों की संख्या कुछ ही प्रतिशत है, जो तहसीलदार और एसडीएम का कोर्ट नहीं चलने देना चाहते हैं,अधिवक्ताओं को कोर्ट नहीं चलने का मुख्य फायदा यह होता है कि हर तारीख पर अपने अनुरूप फीस मुवक्किलओ से लेते हैं और कोर्ट नहीं चलने का हवाला देते हुए अगले तारीख पर फिर आने के लिए कहते हैं ऐसे में आम जनता परेशान हो चुकी है / खास कर मेजा तहसील पर वकीलों द्वारा यही रुख अपनाने पर आम नागरिक परेशान है जब भी तहसीलदार /एसडीएम द्वारा कोर्ट चलाने का निर्णय लिया जाता है उसी समय कुछ अधिवक्ता कोर्ट परिसर में पहुंच कर के प्रस्ताव देकर शोरगुल करके कोट नहीं चलने का दबाव बनाते हैं । अब हालात बद से बदतर हो चुकी है । जिलाधिकारी प्रयागराज को चाहिए कि स्पेशल पुलिस फोर्स की मौजूदगी में कोर्ट चलाने का आदेश दे उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी को भी तहसील प्रणाली पर सख्त निर्देश देते हुए कोर्ट चलाने का आदेश जिलाधिकारी को देना चाहिए ताकि संविधान के न्याय प्रणाली पर आम जनमानस का भरोसा कायम रहे ।साथ ही ऐसे शोरगुल मारपीट करने वाले अधिवक्ताओं की सूची जारी कर उनका वकालत का लाइसेंस निरस्त कर दे।