
बरेली। परिवार से दूर रहकर नौकरी करने या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी युवतियों के लिए सुरक्षित और किफायती आशियाना खोजना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। मलूकपुर पुलिस चौकी के पास संचालित ‘सखी निवास’ (वर्किंग वूमेन हॉस्टल) ने इस मुश्किल को आसान कर दिया है। मिशन शक्ति योजना के तहत संचालित यह हॉस्टल आज बेटियों के लिए सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का बड़ा केंद्र बन चुका है।
यहाँ नाममात्र के खर्च पर युवतियों और महिलाओं को घर जैसा माहौल मिल रहा है। परिसर में सुसज्जित कमरे, पौष्टिक भोजन, शुद्ध पेयजल, 24 घंटे सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी की तीसरी आंख से निगरानी जैसी पुख्ता व्यवस्थाएं हैं। अनुशासन और सुरक्षित माहौल के चलते दूर-दराज के जिलों व ग्रामीण इलाकों से आई छात्राएं बिना किसी डर के अपने करियर पर ध्यान दे पा रही हैं।
कामकाजी माताओं को मिला ‘पालना’ का सहारा
इस हॉस्टल की सबसे बड़ी ताकत कामकाजी माताओं के लिए शुरू की गई डे-केयर (पालना) सुविधा है। छोटे बच्चों की देखभाल के अभाव में अक्सर महिलाओं को नौकरी या पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती थी। अब वे अपने मासूमों को यहाँ सुरक्षित हाथों में सौंपकर बेफिक्र होकर दफ्तर, कॉलेज या कोचिंग जा रही हैं।
महिला कल्याण विभाग की यह पहल धरातल पर आधी आबादी के हौसलों को नई उड़ान दे रही है। सुरक्षित छत और भरोसेमंद माहौल मिलने से अभिभावक भी निश्चिंत हैं और बेटियां पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को हकीकत में बदलने में जुटी हैं।