झूठ बोलना पाप है’… लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिए ये 5 ‘सफेद झूठ’ ?  सिखाना है बेहद जरूरी

​बरेली। बचपन से ही हर माता-पिता अपने बच्चों को सिखाते हैं कि ‘झूठ बोलना पाप है’ और हमेशा सच का साथ देना चाहिए। लेकिन आज के बदलते दौर और बढ़ते अपराधों के बीच, बच्चों की हिफाजत के लिए कुछ ‘सफेद झूठ’ ढाल का काम करते हैं। विशेषज्ञों और पेरेंटिंग गाइडलाइंस के मुताबिक, आपातकालीन स्थितियों में अपनी जान और सुरक्षा के लिए बोला गया झूठ गलत नहीं, बल्कि एक जरूरी जीवन-कौशल (लाइफ स्किल) है।
​माता-पिता को अपने बच्चों को संकट के समय ये झूठ बोलना जरूर सिखाना चाहिए:
​सोशल मीडिया पर पहचान छिपाना: आज 9-10 साल की उम्र से ही बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ रहे हैं। बच्चों को साफ समझाएं कि ऑनलाइन किसी अनजान व्यक्ति को अपना असली नाम, स्कूल, घर का पता या लाइव लोकेशन कभी न बताएं। ऐसे मामलों में गलत जानकारी देना या प्रोफाइल ब्लॉक करना ही समझदारी है।
​”मम्मी-पापा घर पर ही हैं”: अगर बच्चा घर पर अकेला है और कोई अजनबी दरवाजा खटखटाए, तो उसे कभी यह नहीं कहना चाहिए कि “घर पर कोई नहीं है।” बच्चे को बोलना सिखाएं कि— “पापा अंदर आराम कर रहे हैं” या “मम्मी अभी व्यस्त हैं, बाद में आइएगा।” यह झूठ किसी भी अनहोनी को टाल सकता है।
​अजनबियों के सामने ‘सुरक्षा कवच’ वाला झूठ: यदि सड़क पर या किसी सार्वजनिक जगह पर कोई अनजान व्यक्ति बच्चे से निजी जानकारी या फोन नंबर मांगे, तो बच्चे को सिखाएं कि वह गलत नंबर या फर्जी पता बता दे। शिष्टाचार निभाने से ज्यादा जरूरी बच्चे की सुरक्षा है।
​असहज स्थिति में ‘परिवार आसपास है’ कहना: अगर किसी अजनबी की मौजूदगी से बच्चे को डर, बेचैनी या असुरक्षा महसूस हो, तो वह तुरंत यह झूठ बोल सकता है— “मेरे पापा बस पीछे ही आ रहे हैं” या “सामने वाली दुकान पर मेरे भैया खड़े हैं।” ऐसे समय में सच बोलने की जिद जान जोखिम में डाल सकती है।
​घर की आर्थिक स्थिति पर पर्दा: बाहर के लोगों, रिश्तेदारों या अजनबियों के सामने घर के पैसों, बैंक बैलेंस या कीमती सामान के बारे में बच्चों को हमेशा अनजान बनने की आदत डालनी चाहिए। किसी भी चालाक व्यक्ति के पूछने पर उन्हें सीधा कहना सिखाएं— “मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता।”
​अभिभावकों के लिए सबक:
सच्चाई और ईमानदारी जिंदगी के बेहतरीन गुण हैं, लेकिन आत्मरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं। बच्चों को यह फर्क समझाना जरूरी है कि किसी को धोखा देने के लिए झूठ बोलना गलत है, लेकिन खुद को खतरे से बचाने के लिए ‘चालाकी और समझदारी’ दिखाना बिल्कुल सही है।

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पं.सत्यम शर्मा

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