
भट्ठी तोड़ी, 500 लीटर शराब और भारी मात्रा में लहन मिला था, फिर भी दोबारा सक्रिय होने की चर्चा
बरेली। नवाबगंज क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब के कारोबार को लेकर आबकारी विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 15 जुलाई को पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त छापेमारी में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 500 लीटर अवैध कच्ची शराब, भारी मात्रा में लहन और शराब बनाने के उपकरण बरामद किए गए थे। उस समय दावा किया गया था कि अवैध भट्ठी ध्वस्त कर दी गई है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने दिनों बाद भी क्षेत्र में अवैध शराब का धंधा पूरी तरह बंद नहीं हो सका है।
15 जुलाई की कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम को देखकर शराब तस्कर सरपत और गन्ने के खेतों का सहारा लेकर फरार हो गए थे। मौके से जैतपुर मांझा निवासी रोहित, कल्लू और दुर्गागंज मांझा निवासी हट्टी समेत छह लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने 500 लीटर कच्ची शराब बरामद कर नष्ट की थी तथा करीब 2000 कुंतल लहन भी मौके पर नष्ट कराया गया था।
अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी यदि क्षेत्र में अवैध शराब की गतिविधियां जारी हैं तो आबकारी विभाग की नियमित निगरानी और गश्त कितनी प्रभावी है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के बाद कुछ दिन सन्नाटा रहता है, लेकिन फिर अवैध शराब बनाने और बेचने का काम शुरू हो जाता है।
लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग की टीमें अक्सर केवल औपचारिक जांच तक सीमित रह जाती हैं, जबकि अवैध शराब माफिया लगातार अपना नेटवर्क मजबूत किए हुए हैं। यदि नियमित निगरानी, खुफिया सूचना पर कार्रवाई और दोषियों की गिरफ्तारी समय पर हो, तो इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जाए और अवैध शराब के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि लगातार प्रभावी अभियान चलाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।