
बरेली, मीरगंज। मीरगंज क्षेत्र के ग्राम रैया नगला में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली (Clarias gariepinus) के अवैध कारोबार पर प्रशासन ने गुरुवार को बड़ा प्रहार किया गया । उप जिलाधिकारी (एसडीएम) मीरगंज और सहायक निदेशक मत्स्य बरेली की संयुक्त टीम ने पुलिस बल के साथ औचक छापेमारी कर करीब दो क्विंटल प्रतिबंधित मछली को मौके पर ही नष्ट करा दिया। इस कार्रवाई से इलाके के अवैध मत्स्य पालकों में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन को सूचना मिली थी कि गांव निवासी चांद बाबू अपने 2.5 बीघे के तालाब में चोरी-छिपे थाई मांगुर का पालन कर रहा है। औचक निरीक्षण के दौरान तालाब में 250 से 300 ग्राम वजन की लगभग 2 क्विंटल अफ्रीकन कैटफिश (थाई मांगुर) पाई गई। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने पंचनामा भरवाकर पूरी खेप को तत्काल नष्ट करवा दिया। साथ ही आरोपी चांद बाबू को चेतावनी दी कि यदि दोबारा पालन किया गया तो सीधे मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
सेहत के लिए ‘धीमा जहर’, NGT ने लगाया है प्रतिबंध
कैंसर व गंभीर बीमारियों का खतरा: अधिकारियों ने बताया कि थाई मांगुर सड़ा-गला मांस और गंदगी खाती है। इसके शरीर में लेड, कैडमियम और मरकरी जैसे घातक रसायन जमा हो जाते हैं, जिसका सेवन मानव शरीर के लिए जानलेवा है।
देसी मछलियों का काल: यह बेहद आक्रामक मांसाहारी मछली है, जो जलीय पर्यावरण और स्थानीय देसी मछलियों को पूरी तरह खत्म कर देती है।
देशभर में पूर्ण प्रतिबंध: पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को भारी क्षति पहुंचाने के चलते राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने वर्ष 2000 से ही इसके पालन, खरीद-फरोख्त और परिवहन पर पूर्ण रोक लगा रखी है।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि जनपद में कोई भी व्यक्ति थाई मांगुर का पालन, बिक्री या सेवन न करे। कहीं भी अवैध कारोबार पाए जाने पर बिना किसी रियायत के कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।