
बरेली। घुटने या कूल्हे का जॉइंट रिप्लेसमेंट लाखों मरीजों को दर्द से राहत देता है, लेकिन कई बार वर्षों बाद कृत्रिम जोड़ में खराबी आने पर दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इस प्रक्रिया को रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट कहा जाता है, जो सामान्य जॉइंट रिप्लेसमेंट की तुलना में अधिक जटिल मानी जाती है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं ऑर्थोपेडिक्स विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. साइमन थॉमस के अनुसार, समय के साथ इम्प्लांट का घिस जाना, ढीला पड़ना, संक्रमण, जोड़ का बार-बार खिसकना, इम्प्लांट के आसपास हड्डी टूटना या लगातार दर्द और अकड़न बने रहना ऐसे प्रमुख कारण हैं, जिनकी वजह से रिवीजन सर्जरी करनी पड़ सकती है।

उन्होंने बताया कि यदि जॉइंट रिप्लेसमेंट के बाद दर्द बढ़ने लगे, सूजन कम न हो, चलने-फिरने में परेशानी आए, जोड़ अस्थिर महसूस हो या बुखार और लालपन जैसे संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। समय रहते विशेषज्ञ से जांच कराने पर इलाज आसान और अधिक सफल हो सकता है।
डॉ. थॉमस ने कहा कि आज 3डी प्लानिंग, रोबोटिक तकनीक और आधुनिक इम्प्लांट की मदद से रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सटीक हो गया है। सर्जरी के बाद नियमित फिजियोथेरेपी, व्यायाम और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से मरीज दोबारा सामान्य, सक्रिय और बेहतर जीवन जी सकता है।