
बरेली: कानों में घंटी, भिनभिनाहट, सीटी, क्लिक या गूंज जैसी आवाज़ें सुनाई देना, जबकि आसपास वास्तव में कोई आवाज़ मौजूद न हो, एक सामान्य समस्या है जिसे चिकित्सकीय भाषा में टिनिटस (Tinnitus) कहा जाता है। कई लोगों को यह समस्या कभी-कभी होती है और अपने आप ठीक भी हो जाती है, लेकिन यदि यह बार-बार हो या लंबे समय तक बनी रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सुनने की क्षमता या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
टिनिटस स्वयं कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में मौजूद किसी अन्य समस्या का लक्षण होता है। यह समस्या कानों की सुनने वाली प्रणाली, भीतरी कान, ब्लड वेसल्स या नर्वस सिस्टम से जुड़ी हो सकती है। कुछ लोगों को यह आवाज़ एक कान में सुनाई देती है, जबकि कुछ को दोनों कानों में या सिर के भीतर से आती हुई महसूस होती है। इसकी तीव्रता भी अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोगों के लिए यह हल्की और मुश्किल से महसूस होने वाली होती है, जबकि कुछ मामलों में यह दैनिक जीवन, कामकाज और नींद को प्रभावित करने लगती है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के ईएनटी (कान, नाक एवं गला) विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. संदीप अरोड़ा ने बताया “टिनिटस के सबसे आम कारणों में तेज आवाज़ों के संपर्क में रहना शामिल है। लंबे समय तक ऊंची आवाज़ में हेडफोन का इस्तेमाल करना, तेज संगीत वाले कार्यक्रमों में जाना, शोर-भरे कार्यस्थलों पर काम करना या पटाखों जैसी अचानक तेज आवाज़ों का संपर्क भीतरी कान की संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे सुनने की क्षमता कम होने के साथ-साथ टिनिटस की समस्या भी विकसित हो सकती है। बढ़ती उम्र के साथ होने वाली सुनने की कमजोरी भी इसका एक प्रमुख कारण है और बुजुर्गों में अक्सर लगातार कान बजने की शिकायत देखने को मिलती है। इसके अलावा कानों में संक्रमण, अत्यधिक मैल जमा होना, कान में तरल पदार्थ भर जाना या सूजन जैसी समस्याएं भी टिनिटस का कारण बन सकती हैं। ऐसे मामलों में मूल समस्या का उपचार करने से लक्षणों में सुधार आ जाता है। मानसिक तनाव और चिंता भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि तनाव की स्थिति में व्यक्ति इन आवाज़ों पर अधिक ध्यान देने लगता है, जिससे वे और अधिक तेज या परेशान करने वाली महसूस होती हैं।“

कुछ दवाइयों के अधिक मात्रा में सेवन से भी टिनिटस की समस्या हो सकती है। वहीं उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, थायरॉयड संबंधी विकार, टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) की समस्याएं, मेनिएर रोग और कुछ रक्त वाहिका संबंधी विकार भी इस समस्या के विकास या गंभीरता को बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। टिनिटस से पीड़ित लोग अक्सर कानों में घंटी बजने, भिनभिनाहट, गूंज, क्लिक या धड़कन जैसी आवाज़ें सुनने की शिकायत करते हैं। इसके साथ सुनने की क्षमता में कमी, चक्कर आना, कान भरे हुए महसूस होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन और नींद से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। लंबे समय तक रहने वाला टिनिटस व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
डॉ. संदीप ने आगे बताया “हालांकि अधिकांश मामलों में टिनिटस गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षणों को चेतावनी संकेत माना जाता है और इनमें तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक होता है। यदि अचानक सुनने की क्षमता कम हो जाए, केवल एक कान में टिनिटस हो, तेज चक्कर आएं, संतुलन बनाने में कठिनाई हो, चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो, गंभीर सिरदर्द हो या कानों में सुनाई देने वाली आवाज़ दिल की धड़कन के साथ तालमेल में हो, तो यह किसी गंभीर नर्वस सिस्टम, ब्लड वेसल्स या भीतरी कान की समस्या का संकेत हो सकता है। टिनिटस के कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर सबसे पहले विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं और कानों की जांच करते हैं। इसके बाद सुनने की क्षमता की जांच (ऑडियोमेट्री) और स्पीच रिकग्निशन टेस्ट किए जा सकते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में एमआरआई, सीटी स्कैन और रक्त जांच की भी आवश्यकता पड़ सकती है ताकि किसी छिपी हुई बीमारी का पता लगाया जा सके।“
टिनिटस का उपचार इसके कारण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। यदि समस्या कान के संक्रमण, मैल जमने, उच्च रक्तचाप, TMJ विकार या किसी दवा के कारण हो रही है, तो संबंधित कारण का उपचार किया जाता है। जिन मरीजों को सुनने की कमी होती है, उनमें हियरिंग एड्स अक्सर सुनने की क्षमता सुधारने के साथ-साथ टिनिटस की तीव्रता को भी कम कर सकते हैं। इसके अलावा साउंड थेरेपी, जैसे व्हाइट नॉइज़ मशीन, प्रकृति की आवाज़ें या विशेष टिनिटस मास्किंग सिस्टम, शांत वातावरण में टिनिटस की अनुभूति को कम करने में मदद करते हैं। टिनिटस रिट्रेनिंग थेरेपी और काउंसलिंग भी मरीजों को इस स्थिति के साथ बेहतर तरीके से सामंजस्य बैठाने में सहायता कर सकती हैं।
टिनिटस से बचाव के लिए सुनने की क्षमता की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। शोर-भरे वातावरण में कानों की सुरक्षा करना, हेडफोन की आवाज़ को सुरक्षित स्तर पर रखना, हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिम कारकों को नियंत्रित करना, धूम्रपान से बचना और सुनने से संबंधित किसी भी समस्या के लिए समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
यदि कानों में बजने वाली आवाज़ें कुछ दिनों में अपने आप समाप्त नहीं होतीं, कई सप्ताह तक बनी रहती हैं, समय के साथ बढ़ती जाती हैं या सुनने की क्षमता में बदलाव के साथ दिखाई देती हैं, तो ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से इसके कारणों की पहचान की जा सकती है, लक्षणों की प्रगति को रोका जा सकता है और मरीज के जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार लाया जा सकता है।