जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ को CJI न बनाया जाए। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी इस पर ध्यान देने की कृपा करें।

अगले महीने 8 नवम्बर को वर्तमान चीफ जस्टिस यू यू ललित रिटायर हो जायेंगे और एक महीना पहले 8 अक्टूबर के बाद सरकार द्वारा उनके उत्तराधिकारी का नाम मांगा जाएगा। बेहतर होगा कि सरकार चीफ जस्टिस का कार्यकाल 2 वर्ष के लिए बढ़ा दे जिससे ललित जी ही नवम्बर, 2024 तक कार्यरत रहें।
देश के मुख्य न्यायाधीश का पद ऐसे व्यक्ति को कदापि नहीं मिलना चाहिए जो देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज पर हर फैसले में कुठाराघात करता रहा हो और जिसने हिन्दू महिलाओं को वेश्यावृत्ति की तरफ धकेलने में कोई कसर न छोड़ी हो। चंद्रचूड़ के कुछ फैसले बता रहा हूँ जिनकी वजह से वह चीफ जस्टिस पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं, अतः महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी इस पर ध्यान दे और चंद्रचूड़ के नाम को इस पद के लिए स्वीकृति न दें।
केस 1: तत्कालीन CJI खेहर के साथ बैठे हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कश्मीरी पंडितो की उन पर हुए जुल्म की जांच की याचिका यह कहते हुए ख़ारिज कर दी कि 27 साल बाद क्या सबूत मिलेंगे और अब क्या पब्लिसिटी के लिए आये हो।
केस 2: जस्टिस चंद्रचूड़ ने 29 अगस्त, 2018 को अर्बन नक्सलों की गिरफ़्तारी पर रोक लगाते हुए कहा कि Dissent is the safety Valve of Democracy और ज्यादा दबाव बनाया गया तो प्रेशर कूकर फट जायेगा। ये शब्द उन्होंने तब कहे जब कोर्ट को बताया गया कि आरोपी प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश कर रहे थे।
केस 3: जस्टिस चंद्रचूड़ ने 6 सितंबर, 2018 के फैसले में समलैंगिक रिश्तों को कानूनी जामा पहनाने के लिए IPC की धारा 377 को निरस्त कर भारतीय एवं सनातन संस्कृति पर गहरी चोट की थी। चंद्रचूड़ ने कहा कि Gay Sex कोई अपराध नहीं है। इसके बाद डाबर के 2 समलैंगिक महिलाओं के करवा चौथ के व्रत पर आपत्ति को चंद्रचूड़ ने हिन्दुओं की “असहिष्णुता” बताया।
केस 4: जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने 27 सितंबर 2018 के फैसले में संविधान पीठ में बैठे हुए, “व्यभिचार” को अपराध श्रेणी से हटा दिया और IPC की धारा 497 को निरस्त करते हुए कहा कि महिला पति की संपत्ति नहीं है। अभी हाल ही में एक और फैसले में कहा है कि महिला शादी करके पति को यह स्वीकृति नहीं देती कि वो पति से पूछे बिना शादी के बाहर किसी और से सेक्स नहीं करेगी, पति अपनी पत्नी की Sexulity का मालिक नहीं है।
ऐसा कह कर चंद्रचूड़ ने भारतीय समाज में चरित्रहीनता को बढ़ाने और महिलाओं को वेश्यावृति की तरफ धकेलने के लिए रास्ता बना दिया। क्या राष्ट्रपति मुर्मू एक महिला होते हुए, ऐसे निर्णय देने वाले को चीफ जस्टिस बनाना चाहेंगी?
केस 5: जस्टिस चंद्रचूड़ ने संविधान पीठ में बैठे हुए 28 सितंबर 2018 के फैसले में सबरीमाला मंदिर की 800 वर्ष की सनातन परंपरा को तोड़ कर हर महिला को मंदिर में जाने की अनुमति दे दी जबकि मंदिर में Menstrual period में ही महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। इस तरह चंद्रचूड़ ने सबरीमाला मंदिर को मलिन किया और सनातन धर्म पर कुठाराघात किया।
केस 6: देश की सुरक्षा करने वाली सेना और सेना प्रमुख को 12 नवम्बर, 2021 को जस्टिस चंद्रचूड़ ने अवमानना का केस चलाने की धमकी दे दी वो केवल इसलिए कि 11 महिलाओं को Permanent Commission देने के लिए देरी हुई थी। एक दिन चंद्रचूड़ जी, सियाचिन में रह कर देखिये।
केस 7: अपने 18 फरवरी, 2022 के फैसले में लखनऊ में Anti CAA दंगाइयों को जस्टिस चंद्रचूड़ ने केवल इसलिए छोड़ दिया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के तय किये गए नियमों का पालन नहीं किया। वो केवल दंगाई नहीं थे बल्कि देश के खिलाफ आतंक फैलाने वाले लोग थे और चंद्रचूड़ ने एक काम करने वाली सरकार पर चाबुक लगाने के काम किया दंगाइयों का समर्थन करते हुए।
केस 8: अभी 1 अक्टूबर के फैसले में हर महिला को चाहे नाबालिग ही क्यों न हो, गर्भपात की अनुमति दे दी और यहाँ तक कह दिया कि गर्भपात के लिए महिला की स्वीकृति काफी है, उसके पति या पार्टनर से पूछने की कोई जरूरत नहीं है। इसमें Marital Rape भी शामिल कर दिया जो अभी कानूनी रूप से वैध नहीं है।
ऐसे बहुत फैसले और भी होंगे लेकिन ये खास फैसले हैं जो देश, समाज और सनातन धर्म के लिए खतरनाक हैं और इस वजह से सरकार और राष्ट्रपति जी चंद्रचूड़ को CJI नियुक्त न करें और न ही ललित जी इनके नाम का प्रस्ताव भेजें सरकार को।
Harharmahadev