
योगी सरकार की ‘बुल्डोजर नीति’ के नाम पर बेघर किये गये पत्रकार परिवार की हिमायत में आये पत्रकार..! *पत्रकार परिवार के पुनर्वास एवं 5 करोड़ के मुआवजे की मांग की गई सौपा ज्ञापन एटा। बीते दिवस 15 को स्थानीय सिविल लाइंस में पिछले 35 वर्षों से मकान बना कर रह रहे पत्रकार एस के माथुर के मकान को अवैध बता कर देखते देखते ध्वस्त कर दिया गया तिनका तिनका जोड़ कर बनाया गया आशियाना इस तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा यह इस परिवार ने कभी सोचा नही था। यूँ तो अभी कुछ बरस पहले खरीदी गई जमीन पर बन रहे एक और अन्य मकान को ध्वस्त कर दिया गया गया।परन्तु पत्रकार परिवार आश्वस्त था स्वामित्व के अकाट्य प्रमाणों एवं न्यायालयी प्रक्रिया के चलते शासन प्रशासन कुछ अनहोनी नही करेगा।बताते हैं इस उम्मीद के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के उस आधिकारिक बयान ने उम्मीद बांध दी जिसमे उन्होंने दो टूक कहा था–यह अभियान माफिया पेशेवर अपराधियो के लिये है गरीब बेबस जरूरतमंदों के साथ सरकार पूरी हमदर्दी रखेगी किसी को बिना वजह बेघर नही किया जाएगा। सूबे के मुखिया के आम जनमानस के लिये जारी की गई शासनिक मंशा को उलट दिया गया। पीड़ित पत्रकार एस के माथुर जो पुष्पांजलि टूडे के ब्यूरो चीफ हैं , बताया कि उक्त मकान का निर्माण उनके पिता प्रेमपाल (तत्कालीन कलक्टरों के चालक रहे) ने 1983 में इस जमीन का बैनामा कराया गया था और 1985 में इसका नक्शा भी पास करवाया था। उसके बाद कराया । पीड़ित पत्रकार के अनुसार यह प्रकरण सिविल न्यायालय में भी चल रहा है और माननीय हाई कोर्ट में भी चल रहा है जबकि एटा के अपर जिलाधिकारी प्रशासन आलोक कुमार ने बताया कि पूर्व में ये मकान नगर पालिका परिषद की जमीन पर कब्जा करके बनाया गया था। पत्रकार समाज के लिये अत्यधिक संवेदनशील इस मुद्दे पर बेघर हुये 18 सदस्यों के परिवार के प्रति जनपद एटा सहित अन्य जनपदों के मीडिया संगठनों ने सहानुभूति जता कर गम्भीर पहलकदमी की है। आज जिले के पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपते हुये पत्रकार परिवार के पुनर्वास एवं एवं प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करा कर नीर क्षीर विवेकी निर्णय देने की मांग की है। पत्रकारों ने आज सौपे ज्ञापन में उत्तर प्रदेश शासन से 5 करोड़ के आर्थिक मुआवजे की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है पत्रकार साथी के साथ अन्याय पूर्ण कृत्य से सभी पत्रकार आहत एवं दुखी है। घर से बेघर किये साथी की पारिवारिक पीड़ा असहनीय है।इसके साथ योगी सरकार की वचनबद्धता ” किसी को बिना वजह बेघर न किया जाए” की उलटबासी भी..! अब देखना है जन मानस की पीड़ा के प्रति अपनी संवेदना की नीति की नित नई घोषणा करने बाली सरकार पत्रकार को बेघर किये जाने को लेकर क्या कदम उठाती है..?