भारत रत्न डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर का विश्व के अनोखा भारतीय संविधान


भारत रत्न डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर का विश्व के अनोखा भारतीय संविधान को सामंतवादी सत्ता ने विफल करके देश में समाजिक आर्थिक और राजनितिक विषमता की दीवार खड़ा कर दिए हैं।
दोस्तो डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर के 131वी जन्म दिवस के अवसर पर उनको नमन करते हुए आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
लोक समाज पार्टी की पूर्वी दिल्ली के अध्यक्ष सतपाल ने कल्याण पूरी में बाबा साहेब डा भीम राव अम्बेडकर की 131वी जन्म दिवस उनके जीवन पर गोष्ठी का आयोजन करवाए। उस अवसर पर लोक समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरी शंकर शर्मा (एडवोकेट) , राष्ट्रीय महासचिव बच्चन सिंह l
करौतिया, दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष राम गोपाल चौहान, टिल्लू सिंह, मंजूर गजराज सिंह, जितेंद्र कुमार, सहित सैंकड़ों लोग उपस्थित रहे। सबसे पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव वचन सिंह करौतिया ने दीप प्रज्वलित किए और वहा पर उपस्थित लोगों ने बाबा का माल्या अर्पण किए।
उस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा ने कहा की डॉक्टर भीमराव अंबेडकर उस कालखंड में एक फौजी परिवार में पैदा हुए जहां पर जातिवाद ऊंच नीच का भेदभाव से भरा पड़ा था वह ऐसे गरीब परिवार में पैदा हुए जहां पर उनके लिए उच्च शिक्षा पाने के लिए संभव नहीं था लेकिन लेकिन उनकी प्रतिभा को देखकर जूनागढ़ के राजा ने उनको विदेश में पढ़ने के लिए भेजा और अमेरिका जर्मनी जैसे विकसित राज्यों में वे 32 डिग्रियां पढ़ करके भारत वापस लौटे। उस समय अंग्रेजो के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन के लड़ाई लड़ी जा रही थी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आजादी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और उन्होंने आजादी के बाद संविधान सभा की अध्यक्षता में भारतीय संविधान जो कि विश्व का एक अनोखा संविधान है देश को दिए।
बाबा साहब ने यह है अनुभव किया कि जब तक देश में सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक बराबरी नहीं कायम हो सकती है तब तक देश में समरसता कायम नहीं हो सकता इसीलिए इस परिपेक्ष को ध्यान में रखते हुए नर नारी समानता पर जोर दिया और उन्होंने संविधान में यह व्यवस्था दिया कि सभी के लिए वेतन समान रहेगा । समान काम के लिए समान वेतन रहेगा,इसी प्रकार समानता के अधिकार को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने नौकरियों में जो लोग बिछड़ गए थे जो जातियां पिछड़ गई थी जिनके सरकारी नौकरियों में कोई भी भागीदारी नहीं थी उनको विशेष अवसर दे करके उनको आगे बढ़ाना चाहते थे इसीलिए संविधान के अनुच्छेद 15 में शैक्षणिक इस सिचुएशन में विशेष अवसर देने का प्रावधान किया इसी प्रकार सरकारी नौकरियों में ओबीसी को और दलित के लिए विशेष अवसर देकर संविधान के अनुच्छेद 16 में अदर बैकवर्ड क्लास ओबीसी को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का प्रावधान किया।
जब से देश आजाद हुआ 90 के दशक तक देश में यथासंभव बराबरी के लिए नेहरू से लेकर शास्त्री इंदिरा गांधी कुछ हद तक राजीव गांधी तक बराबरी के लिए काम हुआ लेकिन जब 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह 13 अगस्त 1990 को लालकिला की प्राचीर से मंडल कमीशन को आगे बढ़ाते हुए सरकारी नौकरियों में ओबीसी को 27 परसेंट आरक्षण देने की घोषणा की तो सामंतवादी सोच की पार्टियां और देश की नौकरशाही थी उन्होंने इस मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने का घोर विरोध किया और उसको सुप्रीम कोर्ट में ले गए जिसका परिणाम यह हुआ सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच में तीन के मुकाबले 6 जजों ने यह माना कि बाबा साहब ने जो अनुच्छेद 16 में ओबीसी के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया है वह सही है और मंडल कमीशन की रिपोर्ट संवैधानिक है तब कांग्रेश के प्रधानमंत्री और नौकरशाही को सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उनके समझ से परे रहा।
अटल बिहारी वाजपेई जब तीसरी बार 1998_99 में सरकार बनाए तो सरकारी संपत्तियों को बेचने के लिए अलग से विनिवेश मंत्रालय गठित की करवाया और उस समय के विनिवेश मंत्री श्री अरुण शौरी जी ने 2004 तक देश की सरकारी संपत्तियों को बेचते हुए उन्होंने 24000 करोड़ों की सरकारी संपत्ति बेची उसके बाद केंद्रीय सत्ता कांग्रेश पार्टी की मनमोहन सरकार को ट्रांसफर हुई और उन्होंने भी सरकारी संपत्ति को बेचने का क्रम जारी रखा और जब 26 मई 2014 को देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता मिली तो उन्होंने संघ के प्रमुख मोहन भागवत के इशारे पर देश की सारी संपत्ति को बेचने का कसम खा रखा है जिससे देश के गरीब लोगों का खासकर के दलित ओबीसी के और सवर्ण के 10% गरीब लोगों का आरक्षण खत्म हो जाए।
अगर आजादी के बाद सही देश के सत्ताधारी लोग ईमानदारी के साथ मंडल कमीशन उसमें तो नहीं था लेकिन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 को ध्यान में रखते हुए आबादी के हिसाब से आरक्षण दिए होते तो आज भारत एक विकसित देश राष्ट्र बन जाता और अमेरिका को भी पछाड़ देता लेकिन सामंतवादी सोच की सरकारों ने बाबा साहब के संविधान को विफल कर दिया
लोक समाज पार्टी आम जनता के सहयोग से बाबा साहब के सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास यह रहेगा कि जो भी सरकारी संपत्ति अटल बिहारी बाजपेई से लेकर के मनमोहन से होते हुए मोदी जी तक बेची गई है उन सभी का राष्ट्रीयकरण कर दिया जाएगा जिससे संविधान में प्रदत्त सरकारी नौकरी का अधिकार देश के सभी नागरिकों को प्रदान हो जाए और जब इस तरह से कम चलेगा तो निश्चित ही ज्यादा समय नहीं सिर्फ चार लोग सभा का कार्यकाल में ही भारत एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का सपना साकार हो जाएगा। जय भीम,जय भारत, जय संविधान जय समाजवाद।
गौरी शंकर शर्मा ( एडवोकेट)

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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