बुंदेलखंड में चुनावी महासंग्राम, 19 विधानसभा क्षेत्रों में होगी राजनैतिक दलों की अग्नि परीक्षा

!!.बुंदेलखंड में चुनावी महासंग्राम, 19 विधानसभा क्षेत्रों में होगी राजनैतिक दलों की अग्नि परीक्षा: बागियों की सल्तनत सियासत भाजपा एवं सपा के मध्य घमासान, कांग्रेस व बीएसपी का संघर्ष तीसरे और चौथे का.!!

बुंदेलखंड के 7 जिलों की 19 विधानसभा सीटों पर इस बार देखा जाए तो सभी दलों की परीक्षा होने वाली है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के लिए जहां पुराना इतिहास दोहारे की चुनौती होगी, वहीं अन्य दलों पर इस बार भाजपा के इस विजय रथ को रोकने की। वर्ष 2012 के चुनाव में यहां सबसे अधिक सात सीटें बसपा ने जीती थी। अगर देखा जाए तो सभी दलों को बुंदेलखंड की धरती पर इस चुनाव में कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा।
प्रदेश का पठारी इलाका, बुंदेलखंड यूपी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संसद हो या विधानसभा बुंदेलखंड की चर्चाओं से कभी अछूता नहीं रहा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सात सीटें जीतकर बसपा नंबर एक की पार्टी बनी थी, लेकिन वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने जीत का ऐसा रिकार्ड बनाया कि सभी दलों का सूपड़ा साफ हो गया। बुंदेलखंड की सभी सीटों पर चुनाव तीन चरणों में होना है। इसीलिए बुंदेलखंड की 19 सीटों पर जीत के लिए सभी पार्टियां एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। बुंदेलखंड को लेकर खूब राजनीति भी हो रही है। वर्तमान में विधानसभा चुनाव के मध्य बागियों की सल्तनत सियासत के साथ भाजपा एवं सपा के मध्य घमासान हो रहा है l कांग्रेस व बीएसपी का संघर्ष तीसरे और चौथे का संघर्ष चल रहा है l
बुंदेलखंड झेल रहा त्रासदी
बुंदेलखंड में कुल सात जिले जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा व चित्रकूट हैं। बुंदेलखंड पठारी इलाका है। यहां पानी की सबसे बड़ी समस्या है। बारिश न होने की वजह से किसान सूखे की मार झेलते हैं। सूखे की मार झेल रहे किसानों के समाने त्रास्दी यह है कि उनके लिए स्थाई समाधान नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार ने यहां पानी की समस्या दूर करने के लिए कुछ योजनाएं जरूर शुरू की हैं।
अलग राज्य की उठी चुकी मांग
बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग काफी हो चुकी है। इसको लेकर सालों आंदोलन चल चुका है। वर्ष 2007 में तत्कालीन सरकार ने यूपी के बंटवारे का प्रस्ताव भी कर दिया था, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। बुंदेलखंड आज भी अपने को उपेक्षित महसूस कर रहा है। बुंदेलखंड समस्याओं के समाधान के लिए अलग राज्य की मांग करता रहा है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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