वही पुराने पिटारों से परिवर्तन पब्लिक हित मे कभी नहीं हो सकते—

वही पुराने पिटारों से परिवर्तन पब्लिक हित मे कभी नहीं हो सकते
एटा-टिकटों की हेराफेरी येतो सिर्फ कुर्सी की चिंता है काश पब्लिक के अधिकारों और एटा के विकास की चिंता सरकारों को होती तो इतनी मेहनत और मंथन की जरुरत ही नहीं पड़ती साढे चार साल का कार्यकाल हो या पूर्व की सरकारों का एटा की बदहाली किसी ने दूर नहीं कर पाई हमारे कहने का मतलब साफ हैकि बिजली कारखाना, और मेडिकल भाजपा की देन है या सपा की जो आता है वह अपने मुंह मिट्ठू की—–इन दो कार्यों पर घमंड से ठगी हुई पब्लिक पर ऐहसान कर जाता है,धूल फांकती शहर की सड़कें, नशे मे डूबाभविष्य का युवा,ना कोई उद्योग नाही ट्रेन जैसी सुविधाएं नशीव हुई एटा जिला विद्वानों का गण है लेकिन बदनाम अपराध से है क्यों कि न शिक्षा की क्वालिटी न जिला जैसी सुवधाए भेड़ बकरियों जैसा यातायात,कहा जाए तो यह जिला धर्मों की राजनीति मे इस तरह जकड़ा हुआ है,कि जिंदगी भी जिसकी लाठी उसकी—-रह गई राजनीति के मंच से पब्लिक के हित मे नहीं जब आपसी तंज सुनते है,तो सर्म आती हैकि राजनीति की दशा भी अंधो के हाथ बटेर—सच हम एटा के एक भी विधायक से खुश नहीं है क्यों जुवान के शिवाय एटा की धरा पर कुछभी एसा हैही नहीं नेता फीता काटने और और हवन की शोभा बढाने के लिये पब्लिक अपना अमूल्य वोट नही देती है पब्लिक को अपने नेता मे भेदभाव रहित सभी क्वालिटी की जरूरत होती है,लौटफैर कर वही पुराने घिसेपिटे मोहरों का खेल दुनियां मे पढे लिखे राजनीति योग्य सच्चे इंसान ही नहीं रहे बंसवाद और दागदार नेताओं से अब राजनीति भी परेशान और सर्मसार है,वही पुराने पिटारों से परिवर्तन पब्लिक के हित मे कभी नहीं हो सकते है यह उथलपुथल सिर्फ कुर्सी की है इतना मंथन सरकारों ने पहले किया होता तो ये दिन किसी भी पार्टा को नहीं देखने पड़ते।
लेखिका, पत्रकार, दीप्ति चौहान।

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks