जब पुलिस ही अपराधी हो तो न्याय कहाँ से मिलेगा-सुशील

जब पुलिस ही अपराधी हो तो न्याय कहाँ से मिलेगा-सुशील
उत्तर प्रदेश जिला लखीमपुर मैगलगंज-खीरी
लगातार समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहने वाले मामले में खबरों पर सुशील विश्कर्मा गरीब मजदूर के हाथ अभी कुछ नही लग पाया है।

सुशील के अनुसार उसने पिछले 3 बर्ष मैं अर्श से लेकर फर्श तक टॉप टू बॉटम सैकड़ो प्रार्थना पत्र देश प्रदेश के तमाम अधिकारियों मुख्यमंत्री लखनऊ जनता दरबार
प्रधानमंत्री को अभी तक देकर न्याय की मांग की
हर तरफ से आदेश हुए औपचारिकता पूरी की गई

लेकिन कोई नतीजा नही निकला।

पूरा मामला मैगलगंज कोतवाली का है। लगभग दो वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक के द्वारा सरकारी आवास में भारी मात्रा में बनवाये गए घरेलू व इमारती फर्नीचर की मजदूरी के मामले में पीड़ित पक्ष अभी तक खाली हाथ है।पीड़ित के अनुसार उसने न्याय पाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया।जब पुलिस ही अपराधी हो तो न्याय कहाँ से मिलेगा ??
आपको बता दें वर्ष 2018 में मैगलगंज कोतवाली में तैनात प्रभारी निरीक्षक घनश्याम राम पर तस्करी की हुई लकड़ी से सरकारी आवास में घरेलू व इमारती फर्नीचर के निर्माण कस्बे के ही सुशील कुमार व इन्ही के अन्य साथी मिस्त्रीयों के द्वारा कराये जाने व काम के एवज में तय राशि के विपरीत कम मजदूरी दिए जाने का आरोप लगा था।

पीड़ित पक्ष के अनुसार पुलिस थानेदार और दरोगा से 3 लाख रु.मजदूरी की बात हुई थी लेकिन काम हो जाने के बाद मात्र 50 हजार रु.ही मजदूरी दी गयी।बकाया रकम मांगने पर जानलेवा हमले व फर्जी मुकदमे में जेल भेज देने की धमकी मिलने पर उसने मकान आदि बेचकर साथी मिस्त्रियों का व किराये पर लाई गई मशीनों का भुगतान किया

पीड़ित पक्ष ने न्याय की आस में
उत्तर प्रदेश डी जी पी ,मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के पास गुहार लगाई। तब जाकर डी जी पी के निर्देश पर जांच में मामला सही पाए जाने पर उपरोक्त प्रभारी निरीक्षक व दरोगा को दोषी पाए जाते हुए सम्बंधित इंस्पेक्टर की चरित्र पंजिका पर परिनिन्दा लेख अंकित करने के आदेश संबंधित पुलिस कार्यालय को दिए गए हैं ।

पीड़ित का कहना है कि केवल परिनिन्दा लेख से मुझे न्याय नही मिलता साहब मैंने तो अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है न्याय के खातिर।पीड़ित की मांग है कि संबंधित पुलिसकर्मियों पर मुकदमा पंजीकृत किया जाए व मेरी मजदूरी मय ब्याज मुझे दिलवाई जाए।

अब देखना ये है कि शासन प्रशासन मजदूर को मजदूरी, न्याय दिलवाने में क्या कदम उठाता है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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